वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में 1.72 लाख करोड़ रुपए का बजट प्रस्तुत किया। राजनांदगांव, जो एक प्रमुख कृषि और व्यापारिक केंद्र है, इस बजट के केंद्र में रहा। सत्तापक्ष इसे ‘विकसित छत्तीसगढ़ 2047’ की आधारशिला बता रहा है, वहीं विपक्ष ने इसे ‘दिशाहीन और निराशाजनक’ करार दिया है। भाजपा नेताओं के अनुसार, यह बजट केवल वित्तीय आवंटन नहीं है, बल्कि राज्य के भविष्य का ब्लूप्रिंट है, जो सर्वांगीण विकास और अधोसंरचना पर जोर देता है। उन्होंने इसे कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए ‘संजीवनी’ बताया। भाजपा किसान नेता अशोक चौधरी और जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष सचिन सिंह बघेल ने बजट को किसानों के लिए ऐतिहासिक बताया। उनके अनुसार, इंद्रावती नदी पर बैराज और मोंगरा बैराज से पाइपलाइन विस्तार से 80,000 एकड़ भूमि सिंचित होगी। जिला सहकारी बैंकों के डिजिटलीकरण से किसानों को ऋण प्राप्ति में पारदर्शिता और सुगमता मिलेगी, साथ ही कृषि पंपों के लिए मुफ्त बिजली का प्रावधान खेती की लागत कम करेगा। महापौर मधुसूदन यादव ने राजनांदगांव शहर के लिए 50 करोड़ रुपये के विशेष प्रावधानों को रेखांकित किया। इनमें मोहारा एनीकट की ऊंचाई बढ़ाना और तीन नए ओवरहेड टैंकों का निर्माण शामिल है, जिससे पेयजल संकट का समाधान होगा। रेवाडीह, गोकुलनगर, जी.ई. रोड से लखोली और डोंगरगांव रोड का चौड़ीकरण शहर के यातायात को सुगम बनाएगा। इसके अतिरिक्त, राजनांदगांव में फिजियोथेरेपी कॉलेज की स्थापना शिक्षा के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर है। वरिष्ठ भाजपा नेता शिव वर्मा और रवि सिन्हा ने ‘रानी दुर्गावती योजना’ (बेटियों को 1.50 लाख रुपये की सहायता) और महतारी वंदन योजना को गेम-चेंजर बताया। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव और नया रायपुर में नए इंडस्ट्रियल बेल्ट की घोषणा से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। दूसरी ओर, कांग्रेस ने बजट के आंकड़ों को जनता को भ्रमित करने वाला बताया है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह बजट जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता और इसमें कई बुनियादी मुद्दों की अनदेखी की गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक फड़नवीस ने आरोप लगाया कि बजट में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की अनदेखी की गई है।
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