अंकित ने कहा कि ऐसी शादी तो हम कर्ज लेकर भी नहीं कर पाते. हम भी एक सामान्य परिवार से ही आते हैं. यहां 50 से ज्यादा सामान उपहार के तौर पर दिए गए. ये सामान लगभग दो लाख रुपये की कीमत का बताया जा रहा है.
बनारस से आई दुल्हन ने की तारीफ
वहीं ननौरा और बनारस से आए जोड़े ने बातचीत में कहा कि वे इस शादी से बहुत खुश हैं. जिस तरीके से यहां व्यवस्था की गई, वह काबिल-ए-तारीफ है. यहां खाने-पीने की व्यवस्था होटलों से भी अच्छी थी. यहां बेड, सोफा, कूलर, फ्रिज जैसे तमाम उपहार मिले हैं. हमारा इस शादी में सिर्फ आने-जाने का खर्च ही लगा है.
अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन लवकुश नगर के अध्यक्ष संजीव कुमार उर्फ संजू बाबा ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि सम्मेलन के अंतर्गत प्रत्येक नवदंपति को लगभग डेढ़ लाख रुपये मूल्य का घरेलू उपयोग का सामान उपहार स्वरूप प्रदान किया गया, जिससे नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थ जीवन की शुरुआत में सहयोग मिल सके. इस विवाह में झारखंड, मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, इंदौर जैसे शहरों से गरीब बेटियां आई थीं.
उपहार में अन्नपूर्णा माता की फोटो, रामायण, कन्या के लिए लहंगा, पायल, बिछिया, मंगलसूत्र, ज्वेलरी सेट, श्रृंगार सामग्री, पांच साड़ियां, शॉल, चप्पल, पलंग, गद्दा, बेडशीट, तकिया, तकिया कवर, कम्बल, ट्रॉली बैग, प्रेशर कुकर, कलश सेट, स्टील की डलिया, बर्तन सेट, कुपरा, केस रोल दिया गया. वहीं दूल्हे को दिए गए सामान में घड़ी, इलेक्ट्रिक प्रेस, बाथरूम सेट, अलमारी वुडन, एलईडी टीवी, कुर्सी टेबल, कूलर, सिलाई मशीन और पांच लीटर वॉटर कैन शामिल है. इसके अलावा समाजसेवियों ने भी अपनी ओर से कई उपहार दिए. इस आयोजन में न केवल छतरपुर जिले से बल्कि प्रदेश और देशभर से दृढ़ोमर वैश्य समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए. सम्मेलन में सामाजिक एकता, सादगी और समानता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया गया.
32 साल से जारी है सेवा का सफर
बता दें कि यह आदर्श सामूहिक विवाह सम्मेलन पिछले 32 सालों से निरंतर आयोजित किया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य विवाह जैसे पवित्र संस्कार में अनावश्यक खर्च, दिखावे और सामाजिक कुरीतियों पर रोक लगाना, साथ ही समाज को एक सूत्र में बांधना है. समाज द्वारा किए जा रहे इस प्रयास की सर्वत्र सराहना की जा रही है. सामूहिक विवाह सम्मेलन के दौरान सुबह से ही वर-वधू पक्ष और आगंतुकों के लिए स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई थी. वहीं दोपहर 12 बजे से भोजन प्रसाद की व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हुई, जिसमें लगभग 20 हजार समाजजन और अन्य अतिथियों ने प्रसाद ग्रहण किया.
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