झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता में चतरा जिले का तमासिन जलप्रपात प्रमुख स्थान रखता है। यह राज्य के बड़े पिकनिक स्थलों में से एक है, जिसकी ख्याति झारखंड के अलावा बिहार और पश्चिम बंगाल तक फैली हुई है।
नए साल, मकर संक्रांति या अन्य त्योहारों पर झारखंड, बिहार और बंगाल समेत कई राज्यों से पर्यटक और श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। तमासिन जलप्रपात घने जंगलों के बीच स्थित है। नए साल के नजदीक आते ही लोग यहां पहुंचने लगे हैं और यहां के मनोरम दृश्य का आनंद उठा रहे हैं।
दूर से यह दूध की धारा जैसा प्रतीत होता
यह जलप्रपात उजले और फिसलन भरे पत्थरों की चट्टानों से बना है। जब पानी नीचे गिरता है, तो उसका रंग इतना श्वेत और निर्मल दिखाई देता है कि दूर से यह दूध की धारा जैसा प्रतीत होता है। झरने के आसपास फैली सफेद चट्टानें दृश्य को और भी आकर्षक बनाती हैं।
यह जलप्रपात दिखने में शांत और सुंदर लगता है।
जितना खूबसूरत है, उतना ही खतरनाक भी
हालांकि, इस मनमोहक सुंदरता के पीछे एक गंभीर सच्चाई छिपी है। तमासिन जलप्रपात जितना खूबसूरत है, उतना ही खतरनाक भी है। इसी कारण स्थानीय प्रशासन ने इसे ‘डेंजर ज़ोन’ घोषित किया है।
प्रत्येक वर्ष यहां कई पर्यटकों की जान चली जाती है। इसका मुख्य कारण झरने के पास फोटो या सेल्फी लेने का जुनून है। फिसलन भरी चट्टानों पर थोड़ी सी चूक होने पर पैर फिसल जाता है और लोग गहरे पानी में गिर जाते हैं।
घोषणाएं आज भी धरातल पर नहीं उतर सकी
यह जलप्रपात दिखने में शांत और सुंदर लगता है, लेकिन इसकी गहराई और पानी का तेज बहाव इसे बेहद घातक बना देता है। भीड़ होने वाले दिनों में भी स्थानीय गोताखोरों की टीम, एनडीआरएफ की टीम या पुलिस बल की टीम की कोई सुविधा मुहैया नहीं कराई जाती है।
झारखंड राज्य सरकार ने तमासिन जलप्रपात को विकसित करने की बात कही थी। इसे भद्रकाली और मां कालेश्वरी मंदिर के साथ पर्यटन सर्किट में विकसित कर एक नई पहचान दिलाने का ऐलान भी किया गया था। लेकिन, ये घोषणाएं आज भी धरातल पर नहीं उतर सकी हैं।

लोग यहां पिकनिक का लुत्फ उठाते हैं।
पिकनिक और वन भोज के लिए पर्याप्त खुली जगह
जलप्रपात तक उतरने के लिए 316 सीढ़ियां है, जिसका निर्माण लगभग डेढ़ दशक पहले वन विभाग द्वारा कराया गया था। पिकनिक और वन भोज के लिए पर्याप्त खुली जगह तो है, लेकिन सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं का नामोनिशान नहीं है।
तमासिन जलप्रपात का नाम केवल झारखंड तक ही नहीं, बल्कि बिहार और पश्चिम बंगाल में भी प्रसिद्ध है। तमासिन जलप्रपात की प्राकृतिक सुंदरता के साथ इसकी धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता भी जुड़ी हुई है। माना जाता है कि यह रमणीय स्थल कभी महान ऋषि मातंग का आश्रम हुआ करता था, जो इस क्षेत्र की आध्यात्मिक महत्ता को बढ़ाता है।

जलप्रपात के पास एक प्राचीन गुफा मौजूद है, जिसके अंदर तामसी देवी का मंदिर स्थापित है।
श्रद्धालु दूर-दराज से पूजा-अर्चना के लिए भी यहां आते हैं
जलप्रपात के पास एक प्राचीन गुफा मौजूद है, जिसके अंदर तमोगुण की अधिष्ठात्री तामसी देवी या तमसा देवी का मंदिर स्थापित है। श्रद्धालु दूर-दराज से पूजा-अर्चना के लिए भी यहां आते हैं। भक्तों की गहरी आस्था है कि देवी तमासीन की पूजा करने से उनके जीवन से तमोगुण (अज्ञानता, नकारात्मकता) का नाश होता है, मानसिक शांति मिलती है और इच्छाएं पूरी होती हैं।
मकर संक्रांति जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान, श्रद्धालु दूर-दराज से आकर जलप्रपात के कुंडों में पवित्र स्नान करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहाँ स्नान करने से पापों का निवारण होता है। कई श्रद्धालुओं ने यह बताया कि उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए मन्नत मांगी थी, जो पूरी हुई, जिसके बदले में वे तमसा देवी मंदिर में बकरे की बलि देते हैं।

जिला प्रशासन द्वारा अपील की जा रही है कि लोग जानलेवा जगह पर न जाएं।
जलप्रपात के गहरे स्थान पर जमावड़ा न लगाएं: डीडीसी
इधर, चतरा डीडीसी अमरेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि चतरा जिले के कान्हाचट्टी प्रखंड में स्थित तमासिन जलप्रपात काफी खूबसूरत और आकर्षण का केंद्र है, लेकिन उससे कई गुना अधिक खतरनाक और जानलेवा भी है। जिला प्रशासन द्वारा अपील की जा रही है कि लोग जानलेवा जगह पर न जाएं, फिसलन भरी जगह पर न जाएं और जलप्रपात के गहरे स्थान पर जमावड़ा न लगाएं।
विकास कार्यों को लेकर डीडीसी ने कहा कि तमासिन जलप्रपात के विकास को लेकर वह तत्पर हैं। उन्होंने डीएमएफटी (DMFT) के अलावा पर्यटन पदाधिकारी के साथ समीक्षा कर पर्यटन सेल गठित की है। आने वाले दिनों में तमासिन जलप्रपात को झारखंड में एक अलग पहचान दिलाई जाएगी।
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