चंडीगढ़ के बीचोंबीच स्थित सेक्टर-22 के सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत चौंकाने वाली है। यहां डिलीवरी की सुविधा तो उपलब्ध है लेकिन अल्ट्रासाउंड मशीन न होने के कारण गर्भवती महिलाओं को 4.6 किलोमीटर दूर सेक्टर-11 स्थित निजी डायग्नोसिस सेंटर में जाना पड़ रहा है क्योंकि विभाग ने अल्ट्रासाउंड के लिए उस सेंटर से समझौता किया है।
गर्भावस्था के अंतिम महीनों में यह दूरी महिलाओं और उनके परिजनों के लिए भारी पड़ रही है। गर्भवती महिलाओं का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े दावों के बीच सेक्टर-22 की यह तस्वीर कई सवाल खड़े करती है। जब डिलीवरी की सुविधा है तो जरूरी जांच की व्यवस्था क्यों नहीं।
अस्पताल में रोजाना काफी संख्या में महिलाएं प्रसव पूर्व जांच के लिए पहुंचती हैं। डॉक्टर अल्ट्रासाउंड की सलाह देते है लेकिन मशीन न होने से उन्हें सेक्टर-11 रेफर कर दिया जाता है। सार्वजनिक परिवहन, ऑटो का खर्च और लंबी कतारें, इन सबके बीच महिलाओं को घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई मामलों में एक ही दिन में दो जगह के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
सेक्टर-22 निवासी सीमा ने बताया कि सुबह यहां चेकअप कराया, फिर अल्ट्रासाउंड के लिए सेक्टर-11 जाना पड़ा। वहां लाइन इतनी लंबी थी कि शाम हो गई। गर्भावस्था में इतना भागदौड़ करना बहुत मुश्किल है।
अन्य मरीजों को भी लौटाया जा रहा निराश
सिर्फ अल्ट्रासाउंड ही नहीं, अस्पताल में ईएनटी, सर्जरी और स्किन से जुड़ी बीमारियों का नियमित इलाज भी उपलब्ध नहीं है। इन विभागों की सेवाएं न होने से सैकड़ों मरीज रोजाना लौट रहे हैं या उन्हें अन्य अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है। ओपीडी में भीड़ तो दिखती है लेकिन सुविधाओं के अभाव में उपचार अधूरा रह जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सेक्टर-22 अस्पताल शहर के घनी आबादी वाले इलाकों के लिए अहम स्वास्थ्य केंद्र है। यहां मूलभूत सुविधाएं मजबूत हों तो आसपास के सेक्टरों का दबाव कम हो सकता है।
जन औषधि केंद्र पर दवाएं नहीं, निजी दुकान पर ताला
अस्पताल परिसर में स्थित जन औषधि केंद्र पर मरीजों को सस्ती दवाएं मिलनी चाहिए लेकिन हकीकत इसके उलट है। कई जरूरी दवाओं की उपलब्धता नहीं होने से मरीजों को बाजार का रुख करना पड़ रहा है। खास बात यह है कि डॉक्टर जिन ब्रांडेड दवाओं को लिख रहे हैं, उनकी सॉल्ट तक जन औषधि केंद्र पर उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीजों को मजबूरी में महंगी दवाएं निजी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ती हैं। स्थिति और गंभीर इसलिए हो गई है क्योंकि अस्पताल परिसर में मौजूद निजी मेडिकल स्टोर नए टेंडर की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण बंद है। इसका सीधा असर उन मरीजों पर पड़ रहा है, जो जांच और परामर्श के बाद तुरंत दवा लेना चाहते हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि एक तरफ सरकार सस्ती दवाओं की बात करती है, दूसरी तरफ अस्पताल में न तो पर्याप्त स्टॉक है और न ही वैकल्पिक व्यवस्था।
डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए 19 फरवरी को वॉक इंटरव्यू रखा गया है। उसमें स्किन, सर्जरी, ईएनटी और साइकैट्रिस्ट के लिए कॉल की गई है। उम्मीद है कि जल्द ही मरीजों को बंद पड़ी ओपीडी में फिर से इलाज उपलब्ध हो सकेगा। अल्ट्रासाउंड मशीन की खरीद के लिए जीएमएसएच-16 में प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। उसे भी स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। -डॉ. रितु बस्सी, अधीक्षक, सेक्टर-22 सिविल अस्पताल
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