1.3 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में गिरफ्तार मुंबई निवासी जोशुआ ओस्कर नेविस को चंडीगढ़ जिला अदालत से राहत नहीं मिली। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। आरोपी पिछले साल 14 अगस्त से न्यायिक हिरासत में है। मामले की जांच चंडीगढ़ साइबर सेल कर रही है। पुलिस के अनुसार ठगी की रकम आरोपी के बैंक खाते में ट्रांसफर हुई थी। झूठे केस में फंसाने का आरोप आरोपी के वकील ने अदालत में कहा कि जोशुआ को झूठे केस में फंसाया गया है। जैसे ही उसके खाते में रकम आई, उसने खुद ही बैंक अकाउंट फ्रीज करवा दिया था। इसके बावजूद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। सरकारी वकील ने दलील दी कि बैंक खाता आरोपी ने नहीं, बल्कि साइबर क्राइम पुलिस ने फ्रीज करवाया था। जांच में सामने आया कि आरोपी के खाते में 1.23 करोड़ रुपये पहुंचे थे, जिनमें से 20 लाख रुपये उसने आगे ट्रांसफर भी कर दिए थे। ऐसे में प्रथम दृष्टया उसकी संलिप्तता स्पष्ट होती है। अभियोजन ने यह भी कहा कि यदि आरोपी को जमानत दी गई तो वह सबूतों और गवाहों को प्रभावित कर सकता है। इन तर्कों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने जमानत अर्जी रद कर दी। ऐसे हुआ 1.3 करोड़ का फ्रॉड पुलिस के अनुसार, दिनेश कश्यप ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 17 फरवरी 2025 को उन्हें व्हाट्सएप पर एक संदेश मिला। मैसेज भेजने वाले ने खुद को उनका बॉस बताया और नए प्रोजेक्ट के नाम पर 1.3 करोड़ रुपये एक बैंक खाते में ट्रांसफर करने को कहा। विश्वास में आकर दिनेश ने कंपनी के खाते से 1.3 करोड़ रुपये बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब उन्हें ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने बैंक और पुलिस से संपर्क किया। जांच में खुलासा हुआ कि ट्रांसफर की गई राशि मुंबई निवासी जोशुआ ओस्कर नेविस के बैंक खाते में गई थी। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अब इस केस की सुनवाई अदालत में चलती रहेगी। अगली तारीख पर सरकार की ओर से वकील सबूत पेश करेगा।
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