प्रदेश सरकार ने यूपीएससी से प्रदेश पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति के लिए तीन आईपीएस अधिकारियों का पैनल तैयार करने का अनुरोध किया था. इस प्रस्ताव में 1990 बैच के शत्रुजीत कपूर भी शामिल थे. कपूर 14 अक्टूबर तक राज्य पुलिस प्रमुख थे, लेकिन आईपीएस अधिकारी वाई. पुरन कुमार की आत्महत्या के बाद बढ़ते विवाद के चलते उन्हें अवकाश पर भेज दिया गया था.
1992 बैच के ओपी सिंह का नाम भी शामिल
इस लिस्ट में 1992 बैच के ओपी सिंह का नाम भी शामिल था, जिन्हें कपूर के अवकाश पर जाने के दौरान डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था, लेकिन वे 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. इसके अलावा अन्य अधिकारियों में एस.के. जैन (1991 बैच), अजय सिंगल (1992 बैच), 1993 बैंच के आलोक मित्तल और अर्शिंदर चावला का नाम शामिल है.
हालांकि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने हरियाणा सरकार का भेजा गया प्रस्ताव वापिस करते हुए कुछ आपत्तियां जताई है. यूपीएससी ने अपने पत्र में हरियाणा सरकार को लिखा कि सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह केस के मुताबिक, राज्य सरकार को वैकेंसी की पूर्व-अनुमानित स्थिति में प्रस्ताव भेजना चाहिए, लेकिन शत्रुजीत कपूर केवल अवकाश पर हैं और कभी भी वापस ज्वाइन कर सकते हैं, इसलिए आयोग के अनुसार राज्य में फिलहाल डीजीपी का पद खाली ही नहीं है.
डीजीपी को लेकर प्रदेश सरकार करे फैसला
यूपीएससी ने प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि शत्रुजीत कपूर को 16 अगस्त 2023 को कम से कम दो साल के कार्यकाल के लिए डीजीपी नियुक्त किया गया था. यह अवधि पूरी हो चुकी है, इसलिए अगर राज्य सरकार चाहे तो उन्हें ट्रांसफर कर सकती है, लेकिन तभी जब वह औपचारिक तौर पर यह निर्णय लें कि कपूर को आगे डीजीपी के रूप में नहीं रखना है. यह पूरी प्रक्रिया राज्य सरकार के लिए न केवल पुलिस व्यवस्था की स्थिरता सुनिश्चित करने की चुनौती है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए उसे अपने निर्णयों को और भी स्पष्ट और पारदर्शी बनाना होगा.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.