सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट), चंडीगढ़ बेंच ने सेना की सप्लाई कोर (एएससी) में कार्यरत टी-मेट (इंडस्ट्रियल स्टाफ) कर्मचारियों को ड्रेस अलाउंस के मामले में राहत दी है। ट्रिब्यूनल ने साफ कहा है कि जो लाभ समान परिस्थितियों वाले कर्मचारियों को पहले दिया जा चुका है, उसे मौजूदा आवेदकों से नकारा नहीं जा सकता। याचिका फिरोजपुर कैंट स्थित 29 कंपनी एएससी (सप्लाई) टाइप ‘सी’ में तैनात 23 ग्रुप-सी इंडस्ट्रियल कर्मचारियों की ओर से दायर की गई थी। सभी कर्मचारी टी-मेट, कारपेंटर समेत अन्य औद्योगिक पदों पर कार्यरत हैं। ट्रिब्यूनल ने माना कि मौजूदा याचिकाकर्ता भी गुरमीत सिंह केस के कर्मचारियों की तरह ही समान स्थिति में हैं। ऐसे में उन्हें ड्रेस अलाउंस से वंचित नहीं किया जा सकता। जानिए क्या था पूरा विवाद याचिकाकर्ता सुरेश कुमार, संजय कुमार और विनोद कुमार ने ट्रिब्यूनल को बताया कि 7वें वेतन आयोग से पहले उन्हें हर साल ड्रेस (डंगरी) और हर महीने वाशिंग अलाउंस मिलता था। लेकिन 7वें वेतन आयोग के बाद यह सुविधा बंद कर दी गई। बाद में केंद्र सरकार ने 2 अगस्त 2017 और 31 अगस्त 2017 के ऑफिस मेमोरेंडम जारी कर यूनिफॉर्म और वाशिंग अलाउंस को मिलाकर सालाना 5,000 रुपए ड्रेस अलाउंस देने का फैसला किया। इसके आधार पर कुछ यूनिटों में यह अलाउंस दिया भी गया, लेकिन बाद में इसे यह कहकर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई कि इंडस्ट्रियल कर्मचारियों की पात्रता तय नहीं हुई है। पहले ही तय हो चुका है कानून याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि इसी मुद्दे पर कैट पहले ही गुरमीत सिंह बनाम भारत सरकार मामले में यह फैसला दे चुका है कि इंडस्ट्रियल कर्मचारियों को ड्रेस अलाउंस मिलना चाहिए। इस फैसले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी 4 अक्टूबर 2021 को बरकरार रखा था।तीन महीने में फैसला करने के आदेश
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