हिमाचल बीएसएनएल कर्मचारियों द्वारा प्रमोशन को लेकर दायर याचिका चंडीगढ़ कैट ने खारिज कर दी।
चंडीगढ़ स्थित सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) की सर्किट बेंच शिमला ने बीएसएनएल कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है। कैट ने कहा कि साल 2013 की विभागीय परीक्षा (एलडीसीई) के नतीजों में किसी भी तरह की गड़बड़ी या छेड़छाड़ साबित नहीं
हिमाचल प्रदेश के मंडी और सिरमौर जिलों के रहने वाले विनोद कुमार और किशन कुमार ने CAT में याचिका दायर कर बीएसएनएल द्वारा टेलीफोन मैकेनिक पद के लिए आयोजित लिमिटेड डिपार्टमेंटल कॉम्पिटिटिव एग्जाम (LDCE) के परिणामों को चुनौती दी थी। आवेदकों का आरोप था कि परीक्षा के परिणामों में हेरफेर किया गया और उन्हें जानबूझकर प्रमोशन से वंचित रखा गया।
बीएसएनएल के अनुसार कुल 43 पदों के लिए परीक्षा हुई थी। ओपन कैटेगरी में अंतिम चयनित उम्मीदवार को 75 अंक मिले थे, जबकि याचिकाकर्ताओं को क्रमशः 63.75 और 60 अंक ही मिले। इस कारण वे मेरिट सूची में क्रम संख्या 48 और 51 पर रहे और चयन के दायरे से बाहर थे।
(कैट)
उत्तर पुस्तिकाएं दोबारा जांचने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने ट्रिब्यूनल से मांग की थी कि सभी 86 उम्मीदवारों की मूल उत्तर पुस्तिकाएं पेश कर उनके अंकों की तुलना कराई जाए और सही पाए जाने पर उन्हें उसी तारीख से प्रमोशन दिया जाए, जिस तारीख से अन्य चयनित कर्मचारियों को लाभ मिला।
बीएसएनएल ने ट्रिब्यूनल में जवाब दाखिल कर कहा कि परीक्षा वर्ष 2013 में हुई थी और परिणाम भी उसी वर्ष घोषित कर दिए गए थे। इसके अलावा नियमों के अनुसार उत्तर पुस्तिकाएं सिर्फ छह महीने तक सुरक्षित रखी जाती हैं, जिसके बाद उन्हें नष्ट कर दिया जाता है। बीएसएनएल का कहना था कि याचिकाकर्ता मेरिट लिस्ट में चयनित उम्मीदवारों से कम अंक लाए थे।
CAT ने नहीं मानी छेडछाड़ की बात
CAT ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाए कि परिणामों में कोई छेड़छाड़ की गई है। कार्बन कॉपी के आधार पर परिणाम को गलत ठहराया नहीं जा सकता, खासकर तब जब मूल उत्तर पुस्तिकाएं नियमों के तहत नष्ट की जा चुकी हों।
कैट ने याचिका को merit के आधार पर खारिज कर दिया। हालांकि CAT ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश से याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पुराने फैसलों के तहत मिली नियमितीकरण और पेंशन संबंधी सुविधाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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