सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ में 24 घंटे पानी सप्लाई का ड्रीम प्रोजेक्ट अब ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है। चंडीगढ़ प्रशासन ने साफ कर दिया है कि शहर को 24 घंटे पानी की जरूरत नहीं है। जरूरत पुरानी अंडरग्राउंड पाइपलाइन के बुनियादी ढांचे को बदलने की है। इस संबंध में प्रशासन ने एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की मंजूरी के बाद भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) को भेजा जाएगा।
चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से तैयार रिपोर्ट में 24×7 वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट को आगे न बढ़ाने की सिफारिश करते हुए कहा गया है कि इससे नगर निगम पर 1741 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक बोझ पड़ेगा जिसे उठाने की स्थिति में नगर निगम नहीं है। सूत्रों के अनुसार प्रशासक गुलाब चंद कटारिया भी इस परियोजना के पक्ष में नहीं हैं। इस मुद्दे पर हाल ही में मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद की अध्यक्षता में लोकल गवर्नमेंट विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक भी हो चुकी है।
पर्याप्त है मौजूदा पानी आपूर्ति
प्रशासन की रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर में फिलहाल सुबह, दोपहर और शाम तीनों समय पर्याप्त पानी की सप्लाई दी जा रही है जिससे नागरिकों की जरूरतें पूरी हो रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि 24 घंटे पानी देने से जरूरत के बजाय पानी की बर्बादी बढ़ेगी। मौजूदा व्यवस्था को बेहतर बनाकर ही शहर की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार यदि 24 घंटे पानी की योजना लागू की जाती है तो पूरे शहर की करीब 80 प्रतिशत यानी 1013 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बदलनी पड़ेगी क्योंकि अधिकांश पाइपलाइन 50 साल से अधिक पुरानी हो चुकी हैं। इस पर अनुमानित खर्च 1741.58 करोड़ रुपये आएगा, जो आगे बढ़ भी सकता है।
बिल बढ़ने का भी खतरा
प्रशासन ने कहा है कि यदि किसी एजेंसी या केंद्र से फंडिंग मिल भी जाती है तो उसे ब्याज सहित लौटाना होगा। साथ ही योजना की लागत निकालने के लिए पानी के रेट बढ़ाने पड़ेंगे, जिससे आम लोगों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा। इसी कारण प्रशासन अब 24×7 पानी योजना की जगह नई परियोजना के तहत पुरानी पाइपलाइन बदलने पर जोर देने की तैयारी में है।
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