चंडीगढ़ कोर्ट में स्नेचर के खिलाफ मुख्य गवाह मुकरा आरोपी बरी।
चंडीगढ़ की सेशन कोर्ट ने सेक्टर-49 में हुई स्नेचिंग और मारपीट के मामले में आरोपी सागर को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सरकारी वकील आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को पूरी तरह साबित नहीं कर पाया। सबूतों में शक बना रहा, इसलिए आरोपी को इसका फायदा देते हुए
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जिस चाकू की बरामदगी दिखाई गई, उसके इस वारदात में इस्तेमाल होने का कोई ठोस सबूत नहीं है। चाकू पर खून का कोई निशान नहीं मिला। इसके अलावा ऐसा कोई सबूत भी नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि अपराध में उसी चाकू का इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा खुलासा बयान और बरामदगी के दौरान किसी भी स्वतंत्र गवाह को साथ नहीं लिया गया।
कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कानून में सिर्फ यह कहना काफी नहीं होता कि आरोपी ने अपराध शायद किया हो। आरोप लगाने वाले पक्ष को यह पूरी तरह और पक्के तौर पर साबित करना होता है कि अपराध आरोपी ने ही किया है। इस मामले में सबूतों की कड़ी पूरी नहीं बन पाई और कई अहम कडिय़ां गायब रहीं।
मामला थाना सेक्टर-49 चंडीगढ़ में दर्ज एफआईआर 8 मई 2025 से जुड़ा है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 309(6), 126(2) और 311 के तहत मामला दर्ज किया था।
जिला अदालत चंडीगढ़।
जानिए पूरा मामला क्या था
8 मई 2025 की रात करीब 2:45 बजे शिकायतकर्ता मुकेश यादव ईडब्ल्यूएस कॉलोनी, सेक्टर-49 की ओर पैदल जा रहा था। डायनासोर पार्क के पास चार युवकों ने उसे घेर लिया और चाकू दिखाकर जान से मारने की धमकी दी। आरोप था कि हमलावरों ने 15 हजार रुपए नकद और आधार कार्ड, वोटर कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य दस्तावेज छीन लिए और उसके साथ मारपीट की। शोर मचाने पर मुकेश का भाई मनोज मौके पर पहुंचा, उसके साथ भी मारपीट की गई।
पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान आरोपी सागर को गिरफ्तार किया गया और उसके खुलासे के आधार पर एक चाकू बरामद करने का दावा किया गया।
कोर्ट में अपने बयानों से मुकरा गवाह
ट्रायल के दौरान शिकायतकर्ता मुकेश यादव ने कोर्ट में आरोपी की पहचान करने से इनकार कर दिया। उसने कहा कि वह आरोपी को नहीं पहचानता और पुलिस द्वारा दिखाए गए कई दस्तावेज उसके सामने तैयार नहीं किए गए। उसे अभियोजन पक्ष ने शत्रुतापूर्ण गवाह घोषित किया, लेकिन जिरह में भी आरोपी के खिलाफ कोई ठोस बात सामने नहीं आ सकी।
घटना में घायल बताए गए मनोज ने भी आरोपी की पहचान नहीं की और कहा कि अंधेरे की वजह से वह हमलावरों के चेहरे नहीं देख पाया।
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