आमतौर पर वाहनों से निकलने वाले जले हुए मोबिल तेल को बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है. शिक्षक के सुझाव से प्रेरित होकर उन्होंने इस तेल का उपयोगी विकल्प तलाशने की कोशिश की और यह स्टोव तैयार किया.
मोबिल तेल का उपयोगी विकल्प
छात्र राजीव कुमार ने बताया कि आमतौर पर वाहनों से निकलने वाले जले हुए मोबिल तेल को बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है. शिक्षक के सुझाव से प्रेरित होकर उन्होंने इस तेल का उपयोगी विकल्प तलाशने की कोशिश की और यह स्टोव तैयार किया.
कैसे काम करता है स्टोव?
इस मॉडल को बनाने में एक पुराना लोहे का ड्रम, एक छोटा पंखा (फैन) और एक लीटर की मोबिल बोतल का उपयोग किया गया है. ड्रम को मुख्य चूल्हे के रूप में डिजाइन किया गया है. पंखे की मदद से अंदर हवा का प्रवाह बनाए रखा जाता है, जिससे तेल पूरी तरह जलता है. एक लीटर जले हुए मोबिल से करीब चार घंटे तक लगातार खाना पकाया जा सकता है. इस पूरी मशीन को तैयार करने में लगभग 750 रुपये की लागत आई है.
कमजोर परिवारों के लिए सस्ता और उपयोगी
इस स्टोव पर रोटी, सब्जी और चावल आसानी से बनाए जा सकते हैं. छात्रों का कहना है कि जहां एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत करीब 1000 रुपये तक पहुंच जाती है, वहीं इस स्टोव में मात्र 20 से 30 रुपये के खर्च में एक दिन का भोजन तैयार किया जा सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह एक सस्ता और उपयोगी विकल्प साबित हो सकता है.
स्टोव का बड़े पैमाने पर निर्माण
दीक्षा स्किल सेंटर के शिक्षक रामानुज शर्मा ने बताया कि संस्थान में विद्यार्थियों को हमेशा नवाचार के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. ऐसे प्रयोगों से छात्रों में जिज्ञासा बढ़ती है और पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित होती है, जिससे वे अपने करियर में बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं. छात्रों ने बताया कि उनका लक्ष्य इस स्टोव का बड़े पैमाने पर निर्माण करना है, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवार इसका लाभ उठा सकें.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें
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