उदयपुर केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय क्षेत्र लाहौल की पट्टन घाटी में फागली (कूंह) उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। उत्सव में बच्चों से लेकर बुजुर्ग सिर पर फूलों से सजी टोपी और हाथों में जूब (यौरा) लेकर नजर आए। सबने एक-दूसरे को जूब देकर हाल जाना और छोटों ने बड़ों से आशीर्वाद लिया। उत्सव में एक सप्ताह तक अपने नजदीकी रिश्तेदारों में पूरियां बटोरने का भी सिलसिला चलेगा।
गौर रहे कि फागली उत्सव मशालों के त्योहार हालडा के 15 दिन बाद मनाया जाने जाता है। इस त्योहार में लोग एक-दूसरे के घर जाकर तरह-तरह के पकवानों का भी आनंद लेते हैं। उत्सव पट्टन घाटी के मूलिंग से लेकर तिंदी और मयाड़ तक एक साथ मनाया गया। उदयपुर में ग्रामीणों ने फागली उत्सव पर पारंपरिक परिधान में सुसज्जित मां मृकुला देवी के मंदिर में शैणी नृत्य के बाद फागली उत्सव का आगाज किया। वीरवार काे घाटी के हर गांव में धरती पूजन होगा। जिसे स्थानीय बोली में पुनाह कहा जाता है। ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में निश्चित स्थान में एक साथ एकत्रित होकर अपने पितरों व देवी-देवताओं के नाम का स्मरण कर उन्हें जूब (यौरा) समर्पित करेंगे। सर्दी के मौसम में मनाए जाने वाले उत्सव को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। वहीं धरती पूजन (पुनाह) के करीब एक सप्ताह बाद परिस्थितियां अनुकूल रहने की सूरत में लोग खेतों का रुख कर सकते हैं। इसके बाद सब्जियों के उत्पादन के लिए पनीरी लगाने का कार्य शुरू कर दिया जाता है।
विधायक अनुराधा राणा, पूर्व मंत्री डॉ. रामलाल मारंकडा, पूर्व विधायक रवि ठाकुर तथा उपायुक्त किरण भड़ाना ने क्षेत्रवासियों को फागली उत्सव की बधाई दी और इस पारंपरिक धरोहर को संजोए रखने का आह्वान किया।
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