चंडीगढ़ में पत्रकारवार्ता के दौरान भाजपा नेता मनोरंजन कालिया व विनीत जोशी।
पंजाब सरकार द्वारा मुख्यमंत्री सहित सेहत बीमा योजना लागू करने की घोषणा के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। सरकार का दावा है कि इस योजना के तहत राज्य के करीब 65 लाख परिवारों को 10 लाख रुपए तक का सेहत बीमा कवर दिया जाएगा। योजना के क्रियान्वयन के लिए यू
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी ने इस योजना की फंडिंग, पारदर्शिता और व्यवहारिकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा नेता मनोरंजन कालिया ने कहा कि जब योजना के अधिकांश खर्च का वहन राज्य सरकार को ही करना है, तो इसे सेहत बीमा योजना कैसे कहा जा सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि आखिर आएगी कहां से, जबकि पंजाब पहले से ही भारी कर्ज के बोझ तले दबा है।
प्रीमियम भुगतान व्यवस्था पर सवाल
योजना के तहत प्रति परिवार लगभग 1 लाख रुपए का प्रीमियम बीमा कंपनी द्वारा और शेष राशि स्टेट हेल्थ एजेंसी के जरिए पंजाब सरकार द्वारा दिए जाने का दावा किया गया है। भाजपा का कहना है कि यह व्यवस्था सरकार पर भारी वित्तीय दबाव डालेगी।
आंकड़ों के मुताबिक-
- पंजाब पर पहले ही 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज है
- प्रति व्यक्ति कर्ज 1,23,274 रुपए तक पहुंच चुका है
- राज्य को मिलने वाले GST का करीब 40.35% हिस्सा कर्ज और ब्याज चुकाने में चला जाता है
- PSPCL पर 10,500 करोड़ रुपए से अधिक का बकाया है
- वृद्धावस्था और विधवा पेंशन पिछले तीन महीनों से लंबित है
तमिलनाडु मॉडल की नकल
भाजपा का आरोप है कि यह योजना तमिलनाडु सरकार की योजना की कॉपी है। वहां इसी बीमा कंपनी के जरिए 5 लाख रुपए तक का कवर दिया जा रहा है और अब तक 1.45 करोड़ लोग इसका लाभ ले चुके हैं। तमिलनाडु में योजना का लाभ केवल उन्हीं परिवारों को दिया जाता है जिनकी सालाना आय 1.20 लाख रुपए तक है, जबकि पंजाब सरकार बिना स्पष्ट पात्रता के बड़े दावे कर रही है।
राज्य के पैसे के इस्तेमाल पर कानूनी सवाल
विरोधी दलों का यह भी कहना है कि नियमों के तहत राज्य का पैसा राज्य से बाहर खर्च नहीं किया जा सकता, जबकि इस योजना में एक बाहरी बीमा कंपनी के साथ करार किया गया है। इसे लेकर कानूनी और वित्तीय दोनों तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
1 लाख का प्रीमियम, 10 लाख का कवर?
योजना को लेकर सबसे बड़ा विरोधाभास यह बताया जा रहा है कि जहां सरकार और बीमा कंपनी मिलकर करीब 1 लाख रुपए का प्रीमियम दे रही हैं, वहीं जनता को 10 लाख रुपए तक के बीमा कवर का आश्वासन दिया जा रहा है। भाजपा ने इसे योजना की पारदर्शिता और व्यावहारिकता पर सीधा सवाल बताया है।
सरकार इस योजना को गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बड़ी राहत बता रही है, लेकिन राज्य की कमजोर आर्थिक स्थिति, लंबित भुगतानों और बढ़ते कर्ज को देखते हुए इसकी सफलता को लेकर संशय बना हुआ है। अब देखना होगा कि सरकार इन सवालों पर क्या सफाई देती है और योजना को जमीन पर किस तरह उतारती है।
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