तीन बार की पार्षद मंजुषा नागपुरे को निर्विरोध रूप से पुणे का महापौर चुना गया है। 44 वर्षीय मंजुषा नागपुरे को भाजपा ने अपना मेयर पद के लिए उम्मीदवार घोषित किया था। सिंहगढ़ रोड इलाके के वार्ड नंबर 33 से नागपुरे लगातार तीसरी बार पार्षद चुनी गई हैं। इसी के साथ ही भाजपा के सहयोगी दल आरपीआई (ए) के नेता परशुराम वाडेकर उप महापौर बने हैं।
एनसीपी-कांग्रेस उम्मीदवारों ने नाम लिया वापस
दरअसल, एनसीपी की शीतल सावंत और कांग्रेस नेता अश्विनी लांडगे ने महापौर पद की दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया, जबकि एनसीपी पार्षद दत्तात्रेय बहिरात और कांग्रेस के साहिल केदारी ने उप महापौर पद की दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया, जिससे निर्विरोध चुनाव का रास्ता साफ हो गया। वहीं आरपीआई (ए) के नेता परशुराम वाडेक वाडेकर, जिन्होंने पिछले महीने बोपोडी क्षेत्र से सहयोगी भाजपा के टिकट पर नगर निगम चुनाव लड़ा था, उन्होंने उप महापौर पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था।
नागपुरे का आरएसएस से गहरा जुड़ाव
सिंहगढ़ क्षेत्र की पार्षद नागपुरे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई हैं। उनके पास प्रबंधन (बिजनेस मैनेजमेंट) में स्नातकोत्तर डिग्री है। ऐसे में उन्होंने पुणे नगर निगम की सबसे शिक्षित पार्षदों में गिना जाता है। नागपुरे पहली बार साल 2012 में सिंहगढ़ रोड पर आनंदनगर से पार्षद बनी थीं। राजनीति में आने से पहले मंजुषा नागपुरे एक आईटी फर्म में नौकरी किया करती थीं।
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भाजपा के पास 119 वार्ड
165 सदस्यीय पुणे नगर निकाय में भाजपा ने 119 सीटें जीतीं, जबकि अजित पवार की एनसीपी और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) ने मिलकर 30 सीटें हासिल कीं। कांग्रेस को 15 सीटें मिलीं, और उसकी सहयोगी शिवसेना (यूबीटी) को सिर्फ एक सीट मिल पाई।
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