सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नया यूजीसी मसौदा कई स्तरों पर अस्पष्ट है. इसमें पीड़ित, आरोपी और अपील प्रक्रिया से जुड़े प्रावधानों में स्पष्टता नहीं है, जिससे गलत व्याख्या और दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है. इसी आधार पर अदालत ने नए मसौदे पर रोक लगाते हुए पुराने नियमों को ही जारी रखने का आदेश दिया है. मामले में अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी.
छात्रों में बढ़ रही थी आशंका
गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्र अविरल सिंह ठाकुर ने लोकल 18 से कहा कि इस बिल का लगातार विरोध सामान्य वर्ग के छात्रों द्वारा किया जा रहा था. उनका कहना है कि नए बिल में ऐसी स्थिति बना दी गई थी, जिसमें एक पक्ष को पीड़ित और दूसरे को आरोपी के रूप में स्वतः स्थापित कर दिया गया था. इससे जनरल कैटेगरी के छात्रों में भय का माहौल बन रहा था कि कभी भी किसी आरोप में फंसाया जा सकता है.
छात्रों के बीच पैदा हो रहा था विरोधाभास
अविरल सिंह ठाकुर ने आगे कहा कि इस बिल से सामान्य और आरक्षित वर्ग के छात्रों के बीच अनावश्यक विरोधाभास और ध्रुवीकरण की स्थिति बन रही थी. उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि इस तरह के कठोर प्रावधानों की आवश्यकता थी.
एकता और अखंडता को बताया खतरा
छात्रों का कहना है कि हायर एजुकेशन संस्थानों में जिस तरह से यह बिल लाया गया था, उससे छात्र एकता और संस्थानों की अखंडता को खतरा था. देशभर में इसी आशंका को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए. अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2012 के नियमों को लागू रखने का फैसला सराहनीय है, जिससे छात्र ध्रुवीकरण से बचेंगे और कैंपस में सौहार्द बना रहेगा.
अपील के अधिकार को लेकर भी उठे सवाल
छात्रों ने बताया कि नए बिल में अपील के अधिकार को समाप्त कर दिया गया था. यदि किसी विश्वविद्यालय द्वारा मेरिट के आधार पर फैसला लिया जाता, तो उसके खिलाफ अपील का कोई रास्ता नहीं बचता. इसके अलावा कमेटी गठन और पीड़ित की परिभाषा को लेकर भी गंभीर आपत्तियां थीं, जिसमें सभी वर्गों को समान रूप से प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया था.
अपील का कोई प्रभावी विकल्प नहीं था
वहीं छात्र निशांत तिवारी ने कहा कि यदि एससी, एसटी या ओबीसी वर्ग के लोग शिकायत करते, तो सवर्ण वर्ग के छात्रों के पास अपील का कोई प्रभावी विकल्प नहीं था. सुप्रीम कोर्ट की रोक से फिलहाल सभी वर्गों को समान अधिकार मिलने की उम्मीद जगी है. उन्होंने कहा कि इस निर्णय का वे स्वागत करते हैं और सरकार से संतुलित और न्यायपूर्ण कानून लाने की अपेक्षा रखते हैं.
छात्रों ने जताया सुप्रीम कोर्ट का आभार
छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करते हुए कहा कि किसी भी उपयोगी कानून का यदि दुरुपयोग होने लगे, तो उस पर पुनर्विचार आवश्यक हो जाता है. कोर्ट का यह आदेश उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता, न्याय और एकता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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