Bilaspur News: सह प्राध्यापक डॉ दिलीप कुमार ने लोकल 18 को बताया कि मशरूम उत्पादन से होने वाली आय से अब तक 40 से 50 छात्रों की सेमेस्टर फीस और परीक्षा शुल्क जमा किया जा चुका है. यह पहल छात्रों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है.
छात्रा मुस्कान कुमारी ने लोकल 18 को बताया कि सबसे पहले कच्चे माल को बारीक काटकर उसका कटिया बनाया जाता है और उसका ट्रीटमेंट किया जाता है. इसके बाद बैगिंग की प्रक्रिया होती है. बैग में मशरूम का फंगस (स्पॉन) डाला जाता है और उन्हें रस्सियों में एक के ऊपर एक बांधकर हैंगिंग पद्धति से लटकाया जाता है. कुछ ही दिनों में उत्पादन शुरू हो जाता है. मुस्कान का कहना है कि आज के समय में सरकारी नौकरी पाना आसान नहीं है, इसलिए मशरूम उत्पादन जैसे स्वरोजगार भविष्य के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं. इससे घर बैठे अच्छी आय अर्जित की जा सकती है.
20-25 दिन में तैयार होता है ऑयस्टर मशरूम
छात्रा रागिनी कुमारी ने बताया कि वर्तमान में ऑयस्टर मशरूम की खेती की जा रही है. इसका उत्पादन चक्र लगभग 20 से 25 दिनों का होता है. तैयार मशरूम को बाजार में बेचने के साथ-साथ उससे कई वैल्यू एडेड उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं. इनमें मशरूम का अचार, चटनी, पाउडर, ड्राई मशरूम, बड़ी, चकली और सूप जैसे उत्पाद शामिल हैं. रागिनी ने बताया कि इन उत्पादों की बिक्री से होने वाली आय से वह अपनी सेमेस्टर फीस भर रही हैं.
40 से 50 छात्रों की फीस जमा
सह प्राध्यापक डॉ दिलीप कुमार ने बताया कि मशरूम उत्पादन से होने वाली आय से अब तक 40 से 50 विद्यार्थियों की सेमेस्टर फीस और परीक्षा शुल्क जमा किया जा चुका है. यह पहल विद्यार्थियों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है. वर्तमान में ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन हो रहा है जबकि गर्मियों में पैरा मशरूम और मिल्की मशरूम की खेती भी की जाती है.
स्वरोजगार के साथ मार्केटिंग का भी अनुभव
विद्यार्थी केवल उत्पादन ही नहीं बल्कि मशरूम प्रसंस्करण और मार्केटिंग भी सीख रहे हैं. इससे उनमें उद्यमिता के गुण विकसित हो रहे हैं. पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश करने के बजाय वे अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं और अन्य लोगों को भी रोजगार दे सकते हैं.
पौष्टिकता से भरपूर है मशरूम
मशरूम एक पौष्टिक और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ है. यह हाई बीपी और शुगर जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है. नियमित सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कुपोषण की समस्या से भी बचाव होता है. गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का यह प्रयास न केवल आत्मनिर्भरता की मिसाल है बल्कि समाज को शुद्ध और ताजा पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है.
About the Author
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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