घर-घर नल, लेकिन पानी पीने लायक नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश घरों में सरकारी नल कनेक्शन लगे हैं, कुछ घरों में निजी बोरवेल भी हैं, लेकिन इन सभी से निकलने वाला पानी कड़वा और गंदा है. यह पानी पीने योग्य नहीं होने के कारण लोग इसे केवल नहाने, कपड़े धोने जैसे कामों में ही उपयोग कर पा रहे हैं. पीने के पानी के लिए गांव के तालाब किनारे लगे एक नल पर ही सभी की निर्भरता है.
सुबह 4 बजे से लगती है लाइन
पानी भर रही ग्रामीण महिला अन्नपूर्णा कौशिक ने बताया कि पीने के पानी के लिए उन्हें मजबूरी में तालाब किनारे वाले नल तक आना पड़ता है. उन्होंने कहा, “अभी तो थोड़ा जल्दी पानी मिल जाता है, लेकिन गर्मियों में सुबह 4 बजे से लाइन लगानी पड़ती है. शाम को भी भारी भीड़ रहती है, कई बार 7 से 8 बजे तक खड़े रहना पड़ता है.” उन्होंने आगे बताया कि नहाने-धोने का पानी तो मिल जाता है, लेकिन पीने के पानी की समस्या सबसे गंभीर है.
घर के पानी से बिगड़ जाती है तबीयत
गांव की महिला मनीषा ने बताया कि घर का पानी इतना कड़वा है कि पीने से तबीयत खराब हो जाती है. उन्होंने कहा, “इस पानी से खाना तक नहीं बन पाता, दाल भी नहीं पकती. मजबूरी में हमें दूर तक चलकर इस नल से पानी भरना पड़ता है. लाइन में लगकर पानी भरते हैं, लेकिन हमारी सुनने वाला कोई नहीं है.”
नल खराब हुआ तो कई किलोमीटर दूर से पानी
ग्रामीण महिला हरवती ने बताया कि जब तालाब किनारे लगा यह नल खराब हो जाता है, तो हालात और भी खराब हो जाते हैं. उन्होंने कहा, “हमें करीब 2 किलोमीटर दूर आर्मी कैंप से पीने का पानी लाना पड़ता है. तब पूरे गांव की परेशानी और बढ़ जाती है.” उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी और नेता गांव आते तो हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन देकर चले जाते हैं.
वाटर फिल्टर की मांग, समाधान शून्य
ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से गांव में वाटर फिल्टर लगाए जाने की मांग कर रहे हैं, ताकि साफ और सुरक्षित पेयजल मिल सके. बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. गांव वालों में निराशा इतनी बढ़ गई है कि अब उन्हें लगता है कि इसी एक नल के सहारे ही जीवन यापन करना पड़ेगा.
संबलपुरी गांव की यह तस्वीर जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है. जब तक साफ पानी की व्यवस्था नहीं होती, तब तक नल कनेक्शन महज औपचारिकता ही साबित होंगे. ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द वाटर फिल्टर लगाकर उन्हें सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए, ताकि रोजमर्रा की इस जद्दोजहद से उन्हें राहत मिल सके.
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