सहरसा में राज्य सरकार की पहल पर 60 महिलाओं को नया रोजगार मिला है। इन महिलाओं को शहर के शाहपुर वार्ड 07 में जीविका दीदी सिलाई घर से जोड़ा गया है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपने परिवारों की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो रही हैं। यह सिलाई सह उत्पादन केंद्र राज्य सरकार के निर्देश पर खोला गया है। यहां महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और उन्हें कपड़ों के उत्पादन के काम में लगाया गया है। इस पहल से स्थानीय महिलाओं को स्थायी आय का स्रोत मिला है। कपड़े सिलकर कमाती है 15 हजार सत्तरकटैया प्रखंड की पटोरी पंचायत निवासी काजल कुमारी ने बताया कि उनके पति राजमिस्त्री का काम करते हैं, लेकिन उनकी कमाई से परिवार का भरण-पोषण मुश्किल था। जीविका से जुड़ने के बाद और पहले से सिलाई का ज्ञान होने के कारण, अब वह प्रतिदिन 10 से 15 कपड़े सिलकर 12 से 15 हजार रुपए तक कमा लेती हैं। किरण देवी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। पहले वह गांव में सिलाई-बुनाई का काम करके थोड़ी-बहुत कमाई करती थीं। जीविका समूह में जुड़ने के बाद उन्हें नए रोजगार के अवसर मिले हैं। एक कपड़े की सिलाई पर उन्हें 45 रुपये तक की आमदनी होती है, जिससे वे दिन भर में अच्छी कमाई कर पाती हैं। जीविका को प्राथमिकता देती है सरकार सहरसा नगर निगम के आयुक्त प्रभात कुमार झा ने बताया कि सरकार जीविका को उच्च प्राथमिकता देती है। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 7 शाहपुर में महिलाओं को सिलाई सेंटर से जोड़ा गया है और सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। जीविका दीदी द्वारा बच्चों के शर्ट, स्कर्ट और अन्य कपड़े सिले जाएंगे, और इन उत्पादों की बिक्री वहीं की जाएगी, जिससे जीविका दीदियों को सीधा लाभ मिलेगा।
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