होली पर बिहार की राजनीति में बड़े उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं। पार्टी के सूत्र बताते हैं कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर राज्यसभा जा सकते हैं। मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार को सरकार में डिप्टी CM का पद मिल सकता है। सूत्र ये भी बताते हैं कि नीतीश के कुर्सी छोड़ने के बाद बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना तय है। कल यानी गुरुवार को राज्यसभा के लिए नामांकन का आखिरी दिन है। दो सीटें जदयू के खाते में हैं। जिसमें एक सीट पर रामनाथ ठाकुर नामांकन से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। दूसरी सीट को लेकर पार्टी के भीतर गहन मंथन जारी है। आज शाम 6 बजे तक दूसरे उम्मीदवार के नाम की घोषणा किए जाने की संभवना है। इसी बीच सत्ता के गलियारों में बड़े राजनीतिक उलटफेर की चर्चाएं तेज हो गई हैं। CM पद पर बीजेपी दावा कर सकती है सूत्रों के मुताबिक गठबंधन के भीतर एक संभावित फॉर्मूले पर चर्चा हो रही है, जिसके तहत नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजा जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो बिहार में मुख्यमंत्री पद खाली होगा और सत्ता संतुलन बदल सकता है। चर्चा यह भी है कि इस स्थिति में भाजपा, जो गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है, मुख्यमंत्री पद पर अपना दावा ठोक सकती है। अगर नीतीश दिल्ली की राजनीति का रुख करते हैं, तो यह बिहार की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। निशांत को राज्यसभा भेजने का विकल्प दूसरे परिदृश्य में यह संभावना भी जताई जा रही है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर बने रहने और अपने बेटे निशांत कुमार को राज्यसभा भेजने का निर्णय ले सकते हैं। हाल के दिनों में जदयू के कई नेताओं और मंत्रियों ने निशांत की सक्रिय राजनीति में एंट्री के संकेत दिए हैं। अगर नीतीश अपने बेटे को राज्यसभा भेजते हैं तो पार्टी में इसका विरोध कोई भी नहीं करेगा। राज्यसभा के जरिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर की राजनीति का अनुभव दिलाया जा सकता है, जिससे संगठन के भीतर उनकी स्वीकार्यता भी बढ़ेगी। हालांकि अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व और गठबंधन की रणनीतिक सहमति पर निर्भर करेगा। तीसरा नाम भी संभव तीसरे विकल्प के तौर पर पार्टी किसी अन्य वरिष्ठ चेहरे को भी राज्यसभा भेज सकती है। हालांकि रामनाथ ठाकुर का नाम एक सीट के लिए लगभग तय है, लेकिन दूसरी सीट पर अभी भी मंथन जारी है। संभावित नामों में नीतीश कुमार, निशांत कुमार या फिर कोई तीसरा सर्वसम्मत चेहरा शामिल हो सकता है। यह फैसला केवल एक राज्यसभा सीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिहार की सत्ता राजनीति और भविष्य के नेतृत्व की दिशा भी तय कर सकता है। अब सबकी निगाहें जदयू की अंतिम घोषणा पर टिकी हैं।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.