बिहार में राज्यसभा सभा में वोटिंग होगी। पांच सीटों पर छह दावेदारों के कारण ऐसा हो रहा है। पांचवीं सीट पर सबकी निगाहें टिकी हैं। इस सीट के लिए महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल ने अमरेंद्रधारी सिंह (एडी) सिंह को उम्मीदवार बनाया है। एडी सिंह की घोषित संपत्ति बाकी के पांचों उम्मीदवार से काफी अधिक है। इतना ही नहीं वह राज्य के अमीर सांसदों में से एक हैं। राजद ने पिछली बार भी उन्हें राज्यसभा भेजा था। इस बार भी उम्मीदवार बनाया है। एडी सिंह भूमिहार जाति से आते हैं। पांचवीं सीट तेजस्वी यादव की झोली में आए, इसके लिए वह हर संभव कोशिश कर रहे हैं।
एनडीए के भूमिहार विधायकों पर राजद की नजर
राजद उम्मीदवार एडी सिंह की नजर एनडीए के भूमिहार विधायकों पर है। वह इस काम में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के खास रहे एक कांग्रेस सांसद की मदद ले रहे हैं। दरअसल, 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए से कुल 23 विधायक जीत सदन पहुंचे। इनमें भाजपा के 12, जदयू के 8 और लोजपा (राम), हम और रालोमो के तीन भूमिहार विधायक शामिल हैं। सूत्र बता रहे हैं विपक्ष भूमिहार कार्ड और धनबल का प्रयोग कर सकता है। सूत्र यह भी बता रहे हैं विपक्ष के कुछ भूमिहार नेता एनडीए के भूमिहार विधायकों के साथ बैठक भी कर रहे हैं। इस बात ने एनडीए की टेंशन भी बढ़ गई है। अगर विपक्ष एनडीए के भूमिहार विधायकों को अपने पक्ष में करने में कामयाब रहता है तो पांचवी सीट पर एडी सिंह की जीत तय हो जाएगी।
तेजस्वी यादव ने बुलाई बैठक, ओवैसी की पार्टी क्या चाहती है?
बुधवार यानी आज राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने महागठबंधन, बसपा और AIMIM के विधायकों की बैठक बुलाई। वह विधायकों को तकनीकी पहलुओं की जानकारी देंगे। एडी सिंह हर हाल में यह चुनाव जीते इसके लिए विधायकों को कई दिशा निर्देश भी देंगे। इधर, AIMIM के बिहार प्रमुख अख्तरूल ईमान ने समर्थन देने के बदले में विधान परिषद् की एक सीट चाह रहे हैं। वह पहले भी कह चुके हैं हमारे उम्मीदवारों को महागठबंधन का समर्थन करना चाहिए। अख्तरूल ईमान ने कहा कि विपक्ष अगर हमारा वोट लेना चाहता तो उन्हें हमलोगों से संपर्क करना होगा। हमलोग अगर समर्थन देते हैं तो हम चाहेंगे कि राजद भी विधान परिषद् में खाली हो रही एक सीट पर हमारा समर्थन करे। इधर, राजनीतिक पंडितों की मानें तो AIMIM के पांच विधायक राजद उम्मीदवार को समर्थन देते हैं तो राजद के लिए जीत की राह आसान हो जाएगी। क्योंकि, राजद उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह को चुनाव जीतने के लिए छह विधायकों के वोट की जरूरत है। इस जरूरत को AIMIM के पांच और बसपा के एक विधायक मिलकर पूरा सकते हैं।
उपेंद्र कुशवाहा ने किसे क्या जिम्मेदारी सौंपी है?
वहीं एनडीए को पांचवी सीट पर जीत के लिए तीन विधायकों की जरूरत है। सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख और राज्यसभा उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा ने तीन विधायकों को अपने पाले में करने की जिम्मेदारी अपने प्रदेश अध्यक्ष आलोक को सौंपी है। आलोक 2024 के जनवरी में नीतीश सरकार बनाने में राजद के दो विधायकों को एनडीए के पाले में लाकर शक्ति प्रदर्शन कर चुके हैं। अगर वह आईपी गुप्ता, सतीश यादव और एक वोट मैनेज कर लें तो उपेंद्र कुशवाहा की जीत आसान हो जाएगी। उपेंद्र कुशवाहा दावा कर चुके हैं कि राज्यसभा की सभी पांचों सीटें एनडीए जीत रही है। विपक्ष के कई विधायक हमारे संपर्क में हैं। चुनाव के बाद सारी बातें स्पष्ट हो जाएंगी। हमलोग जीत रहे हैं।
2014 में क्या हुआ था ऐसा, जिसका डर एनडीए को
वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष कुमार ने कहा कि 2014 में राज्यसभा का चुनाव हुआ था। तब जदयू ने पवन वर्मा और गुलाम रसूल बलियावी को उम्मीदवार बनाया। वोटिंग के वक्त अचानक जदयू के करीब 18 विधायकों ने बगावत कर दी। निर्दलीय उम्मीदवार साबिर अली और अनिल शर्मा को अपना समर्थन दे दिया। हालांकि, आखिरी समय में राजद ने अपना सपोर्ट जदयू को दे दिया। लेकिन, यह डर आज भी बना हुआ है। मान लीजिए कि अगर विधायक वोट नहीं करते हैं या किसी कारण वश मतदान में शामिल नहीं हो पाएंगे तो इसका सीधा फायदा राजद को होगा।
इधर, एनडीए और महागठबंधन के नेता पांचवीं सीट पर अपना अपना दावा ठोक रहे हैं। इन बयानों को पढ़िए…
- राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने दावा किया है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले सभी लोग एक हैं। हमारे प्रत्याशी एडी सिंह की जीत हो रही है। महागठबंधन के पक्ष में पर्याप्त वोट है। एनडीए के कुछ नेता धनबल का प्रयोग करने में जुटे हैं। लेकिन, हमारे पास पर्याप्त बहुमत है।
- बिहार भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि पांचों सीटों पर एनडीए की शानदार जीत तय है। कहीं कोई संशय नहीं है। विपक्ष के कुछ विधायक भी हमारे संपर्क में हैं। हर हाल में एनडीए की ही जीत होगी।
राज्यसभा चुनाव का गुणा गणित भी जान लीजिए
राज्यसभा में सदस्यों का चुनाव राज्य विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है जिसमें विधान परिषद् के सदस्य वोट नहीं डाल सकते। नामांकन फाइल करने के लिए न्यूनतम 10 सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है। सदस्यों का चुनाव एकल हस्तांतरणीय मत के द्वारा निर्धारित कानून से होता है। इसके अनुसार राज्य की कुल विधानसभा सीटों को राज्यसभा की सदस्य संख्या में एक जोड़ कर उसे विभाजित किया जाता है फिर उसमें एक जोड़ दिया जाता है। राज्यसभा जाने के लिए एक सीट पर 41 विधायकों के वोट की जरूरत होती है। इस तरह पांच सीटों पर 205 विधायकों के वोट की जरूरत पड़ेगी।
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