बिहार के मधेपुरा में शुक्रवार को प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली को लेकर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मत्स्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर पश्चिम बंगाल से लाई जा रही ढाई से साढ़े तीन टन थाई मांगुर मछली जब्त की थी। इसकी अनुमानित कीमत करीब चार लाख रुपये बताई जा रही है। विभागीय प्रक्रिया पूरी करने के बाद जब्त मछली को डीएम आवास के पीछे गुमटी नदी किनारे जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफना दिया गया।
लेकिन जैसे ही टीम वहां से लौटी, स्थानीय लोगों में मछली निकालने की होड़ मच गई। कुदाल, बोरा और टोकरी लेकर लोग गड्ढे की ओर दौड़ पड़े और मिट्टी हटाकर सारी मछली उखाड़ ले गए। देखते ही देखते बड़ी संख्या में भीड़ इकट्ठा हो गई और लोग खुलेआम बोरे में भरकर प्रतिबंधित मछलियां अपने घर ले जाते नजर आए। आश्चर्य की बात यह रही कि सूचना मिलने के बावजूद पुलिस टीम दोबारा मौके पर नहीं पहुंची।
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गौरतलब है कि गुरुवार की रात मत्स्य विभाग ने गुप्त सूचना के आधार पर साहूगढ़ नदी किनारे एक ट्रक को रोका था, जिसमें बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित मछली बरामद की गई। इस दौरान पश्चिम बंगाल के दो व्यक्तियों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया, जो इस अवैध कारोबार में शामिल बताए जाते हैं।
मत्स्य विभाग के पदाधिकारी शिव शंकर चौधरी ने बताया कि थाई मांगुर मछली का क्रय-विक्रय, प्रजनन और पालन देश में पूरी तरह प्रतिबंधित है, क्योंकि यह स्थानीय प्रजातियों और पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक मानी जाती है। उन्होंने कहा कि जिले में प्रतिबंधित मछली के कारोबार पर रोक लगाने के लिए अभियान लगातार जारी है और आने वाले दिनों में इस तरह की अवैध गतिविधियों पर और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई के दौरान मत्स्य पदाधिकारी संतोष कुमार, चंदन कुमार, शिव शंकर कुमार, मत्स्य विकास पदाधिकारी साक्षी प्रिया, राधा कुमारी सहित पूरी टीम मौजूद थी। हालांकि, जब कार्रवाई के तुरंत बाद ही प्रतिबंधित मछली को भीड़ द्वारा उठाकर ले जाने की घटना सामने आई, तो विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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