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Motihari Swami Ravishankar Giri: मोतिहारी से निकलकर जूना अखाड़ा के सबसे कम उम्र के महामंडलेश्वर बनने वाले स्वामी रविशंकर गिरी जी महाराज की कहानी अद्भुत है. ग्रेटर नोएडा से इंजीनियरिंग की पढ़ाई और कोटा में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले स्वामी जी ने अपनी पारिवारिक परंपरा को निभाते हुए संन्यास का मार्ग चुना. महज 32 वर्ष की आयु में सोमेश्वर महादेव अरेराज के पीठाधीश्वर के रूप में प्रतिष्ठित स्वामी जी का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन में भी दर्ज है.
आदित्य गौरव/पूर्वी चांपरणः सनातन धर्म और अध्यात्म की दुनिया में बिहार के एक युवा ने अपनी विद्वता और सेवा भाव से एक नई मिसाल पेश की है. यह कहानी है पूर्वी चंपारण जिले के रहने वाले स्वामी रविशंकर गिरी जी महाराज की. जो महज 32 वर्ष की आयु में पंचदशनाम जूना अखाड़ा के सबसे कम उम्र के महामंडलेश्वर और सोमेश्वर महादेव अरेराज के पीठाधीश्वर के रूप में प्रतिष्ठित हैं. एक आधुनिक इंजीनियर से लेकर महामंडलेश्वर तक का उनका सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं है.
स्वामी जी का शुरुआती जीवन आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बीच बीता. उन्होंने अपनी मैट्रिक तक की पढ़ाई मोतिहारी के मॉडर्न पब्लिक स्कूल से पूरी की. इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वे प्रयागराज चले गए. जहां उन्होंने बिशप जॉर्ज स्कूल एंड कॉलेज से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की. विज्ञान के प्रति गहरी रुचि होने के कारण वे इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने राजस्थान के कोटा में रहकर एक वर्ष तक कठिन परिश्रम किया. फिर ग्रेटर नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की.
पारिवारिक परंपरा और संन्यास का मार्ग
स्वामी रविशंकर गिरी बताते हैं कि संन्यास उनके लिए अचानक लिया गया निर्णय नहीं था, बल्कि यह उनके परिवार की एक पवित्र परंपरा का हिस्सा है. उनके परिवार में पीढ़ियों से यह रीति चली आ रही है कि घर का एक सदस्य अनिवार्य रूप से संन्यासी बनकर ईश्वर और मानवता की सेवा करेग. बचपन से ही भगवान भोलेनाथ में अगाध श्रद्धा रखने वाले स्वामी जी अक्सर सोमेश्वर महादेव अरेराज मंदिर आते रहते थे. इसी अटूट आस्था और कुल परंपरा का निर्वहन करते हुए उन्होंने भौतिक सुखों को त्याग कर संन्यास का मार्ग चुना.
उनकी योग्यता और धर्म के प्रति समर्पण को देखते हुए वर्ष 2021 में हरिद्वार स्थित पंचदशनाम जूना अखाड़ा ने उन्हें सबसे कम उम्र का महामंडलेश्वर घोषित किया. लेकिन स्वामी जी का कार्य केवल अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहा. 2021 के कोविड संकट के दौरान उन्होंने पीड़ित परिवारों की निस्वार्थ भाव से मदद की. उनके इस मानवीय कार्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया और उनका नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन में दर्ज हुआ. वर्ष 2023 में ओंकारेश्वर धाम में आयोजित भव्य शिव प्रतिमा अनावरण समारोह में वे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जो उनके बढ़ते धार्मिक कद को दर्शाता है.
आधुनिकता और आध्यात्म का संगम
स्वामी रविशंकर गिरी का जीवन यह संदेश देता है कि उच्च शिक्षा और आधुनिक डिग्रियां आध्यात्मिक मार्ग में बाधक नहीं, बल्कि सहायक हो सकती हैं. आज वे न केवल धर्म की रक्षा कर रहे हैं, बल्कि जन-सेवा के माध्यम से समाज को एक नई दिशा भी दे रहे हैं. सोमेश्वर महादेव अरेराज के पीठाधीश्वर के रूप में वे वर्तमान में लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं.
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