बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा शुक्रवार को देर शाम दरभंगा पहुंचे। दरभंगा पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह की छोटी पत्नी एवं दरभंगा की अंतिम महारानी कामसुंदरी साहिबा को श्रद्धांजलि अर्पित की। उपमुख्यमंत्री रामबाग स्थित युवराज कुमार कपिलेश्वर सिंह के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने दिवंगत महारानी के तैलचित्र पर फूल-माला अर्पित कर पुष्पांजलि दी और श्रद्धा सुमन अर्पित किया। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। करीब 45 मिनट तक उपमुख्यमंत्री ने युवराज कपिलेश्वर सिंह एवं उनके बड़े भाई राजेश्वर सिंह से बातचीत की। इस दौरान दोनों युवराजों ने दरभंगा महाराज और उनकी विरासत पर लिखी गई पुस्तक उपमुख्यमंत्री को भेंट की।श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद उपमुख्यमंत्री ने दरभंगा में आयोजित अन्य कार्यक्रमों में भी भाग लिया। दरभंगा के इतिहास और विरासत पर आधारित पुस्तक उपमुख्यमंत्री को भेंट की युवराज कपिलेश्वर सिंह ने कहा कि उपमुख्यमंत्री उनके आवास पहुंचे और दादी मां को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि दरभंगा महाराज का योगदान न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण रहा है। उपमुख्यमंत्री ने दादी मां के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने दरभंगा के इतिहास और विरासत पर आधारित पुस्तक उपमुख्यमंत्री को भेंट की। वहीं युवराज राजेश्वर सिंह ने कहा कि उपमुख्यमंत्री ने उनके आवास पहुंचकर दादी मां के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की, इसके लिए वे आभारी हैं। उन्होंने कहा कि विरासत का संरक्षण और विकास ही सच्चे विकास की नींव है। दरभंगा के इतिहास पर आधारित पुस्तक उपमुख्यमंत्री को भेंट कर विरासत के संरक्षण का संदेश दिया गया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि निश्चित तौर पर मिथिला की गौरवशाली विरासत को नमन करने वे दरभंगा आए हैं। उन्होंने कहा कि विरासत ही समाज और संस्कृति की मजबूत नींव रखती है, और जिस दिन विकास विरासत के सम्मान के साथ जुड़ जाएगा, उस दिन विकास की गति चौगुनी हो जाएगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दरभंगा महाराज की भूमिका न केवल बिहार के इतिहास में बल्कि पूरे देश के इतिहास में महत्वपूर्ण रही है। बिहार और मिथिला क्षेत्र ही नही पुरा देश दरभंगा महाराज द्वारा किए गए कार्यों से गौरवान्वित है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के प्रधानमंत्री हमेशा से विरासत को विकास के साथ जोड़कर सम्मान देने की नीति पर जोर देते रहे हैं।
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