कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. महिलाओं और बच्चों ने भी रंगों के इस उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. सभी ने एक-दूसरे को अबीर लगाकर गले मिलते हुए सुख-समृद्धि की कामना की. बुजुर्गों ने भी युवाओं के उत्साह की सराहना की और संयम के साथ त्योहार मनाने की अपील की. कुल मिलाकर भोजपुर में होली मिलन समारोह ने यह साबित कर दिया….
रंगों से सराबोर युवाओं की टोली जब सड़कों पर निकली तो माहौल पूरी तरह फागुनी हो गया. कहीं ढोल की थाप थी तो कहीं डीजे पर सुपरहिट भोजपुरी गानों की धुन पर युवकों ने ठुमके लगाए और होली के पारंपरिक गीतों पर भी नाच-गान किया. कई जगहों पर लोगों ने फूलों की होली भी खेली और एक-दूसरे पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसाईं, जिससे माहौल और भी खुशनुमा हो गया.
कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और शांति व्यवस्था को लेकर स्थानीय प्रशासन भी सतर्क दिखा. आयोजकों ने पहले ही अपील की थी कि होली का जश्न मर्यादा और भाईचारे के साथ मनाया जाए. युवाओं ने भी इस बात का ध्यान रखा कि किसी तरह की जबरदस्ती या विवाद की स्थिति न बने. स्थानीय युवाओं ने बताया कि होली आपसी भाईचारे और प्रेम का पर्व है. “कुर्ता फाड़ होली” सिर्फ मस्ती और दोस्ती का प्रतीक है, इसमें किसी तरह की दुर्भावना नहीं होती.
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. महिलाओं और बच्चों ने भी रंगों के इस उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. सभी ने एक-दूसरे को अबीर लगाकर गले मिलते हुए सुख-समृद्धि की कामना की. बुजुर्गों ने भी युवाओं के उत्साह की सराहना की और संयम के साथ त्योहार मनाने की अपील की. कुल मिलाकर भोजपुर में होली मिलन समारोह ने यह साबित कर दिया कि रंगों का यह त्योहार आज भी लोगों को जोड़ने, पुराने गिले-शिकवे मिटाने और खुशियां बांटने का सबसे बड़ा जरिया है. रंग, उमंग और उत्साह के बीच भोजपुर की होली ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि परंपरा और मस्ती का संगम ही इस पर्व की असली पहचान है.
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