50 डिसमिल जमीन में 350 पौधों से शानदार शुरुआत
गोविंद राम ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उन्होंने कश्मीरी रेड एप्पल बेर की खेती करीब 50 डिसमिल भूमि में की है, जिसमें कुल 350 पौधे लगाए गए हैं. उन्होंने जनवरी महीने में पौधों का रोपण किया था और फिलहाल फसल हार्वेस्टिंग की अंतिम अवस्था में है. एक-दो तुड़ाई के बाद यह फसल समाप्त हो जाएगी.
1.5 लाख की लागत, लेकिन मुनाफा कई गुना
खेती की शुरुआती लागत के बारे में गोविंद राम ने बताया कि ड्रिप सिस्टम, बांस, जाली, पानी की व्यवस्था और पौधे खरीदने में करीब 1 से 1.5 लाख रुपये खर्च हुए. खाद के रूप में उन्होंने डीएपी, यूरिया, पोटाश, माइक्रो न्यूट्रिएंट और गोबर खाद का इस्तेमाल किया. कीट नियंत्रण के लिए उन्होंने देसी उपाय अपनाए, जिसमें गोमूत्र, गोबर और नीम से तैयार घोल का उपयोग किया गया.
धान से 50 हजार, बेर से 2 लाख की कमाई
गोविंद राम ने बताया कि पहले वे धान की खेती करते थे, जिसमें 50 डिसमिल जमीन से 15-17 क्विंटल उत्पादन होता था और मुश्किल से 45-50 हजार रुपये की आमदनी हो पाती थी. वहीं, रेड एप्पल बेर की खेती से वे अब तक करीब 2 लाख रुपये की बिक्री कर चुके हैं और आगे 20-25 हजार रुपये और मिलने की संभावना है. उन्होंने बताया कि शुरुआती लागत एक बार लगती है, उसके बाद मुनाफा लगातार मिलता है.
पढ़ाई और संघर्ष के बाद खेती को बनाया भविष्य
गोविंद राम ने ग्रेजुएशन के बाद माइनिंग से पॉलिटेक्निक की पढ़ाई भी की. नौकरी की तलाश में कई प्रतियोगी परीक्षाएं दीं, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने खेती को ही करियर बनाने का फैसला किया. खेती के लिए उन्हें अपने परिवार से प्रेरणा मिली, क्योंकि उनके पिता पहले से धान की खेती करते थे.
उद्यानिकी विभाग की सलाह बनी सफलता की कुंजी
28 वर्षीय गोविंद राम ने बताया कि उद्यानिकी विभाग से संपर्क करने पर अधिकारियों ने बेर, अमरूद और स्ट्रॉबेरी जैसी फसलों की जानकारी दी. उन्हीं की सलाह पर उन्होंने रेड एप्पल बेर की खेती शुरू की. विभाग के अधिकारी समय-समय पर खेत का निरीक्षण करते हैं और किसी भी समस्या पर फोन, फोटो और वीडियो के जरिए मार्गदर्शन देते हैं। पौधे उन्होंने कोलकाता से मंगवाए, क्योंकि यह किस्म स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं थी.
अब रकबा बढ़ाया, 700 नए पौधों की तैयारी
सफलता से उत्साहित होकर गोविंद राम ने इस साल खेती का रकबा बढ़ा दिया है. उन्होंने बताया कि इस बार 700 नए पौधे लगाने की शुरुआत भी कर दी गई है, जिससे आने वाले समय में आमदनी और बढ़ने की उम्मीद है.
कृषि विशेषज्ञ की राय
कृषि विशेषज्ञ गंगा राम ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि कश्मीरी रेड एप्पल बेर एक उन्नत और आकर्षक वैरायटी है। इसका रंग एप्पल जैसा होता है, जिसमें हरे रंग के साथ लाल आभा भी दिखाई देती है. यह नई फसल होने के कारण बाजार में इसकी अच्छी मांग रही और किसानों को बेहतर दाम मिले.
अनुदान योजना में शामिल करने की मांग
कृषि विशेषज्ञ गंगा राम ने सुझाव दिया कि एप्पल बेर की खेती को और अधिक क्षेत्र में बढ़ाया जाना चाहिए. इसके लिए अन्य किसानों को क्षेत्र भ्रमण कराकर जागरूक किया जाए. उन्होंने शासन और उद्यानिकी विभाग से मांग की कि एप्पल बेर को भी अनुदान योजना में शामिल किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान इस लाभकारी खेती की ओर आकर्षित हो सकें.
युवाओं को सलाह, पौधा सोच-समझकर खरीदें
अंत में गोविंद राम ने किसानों और खासकर युवाओं को सलाह दी कि पौधों का चयन बहुत सावधानी से करें. नर्सरी में जाकर मदर प्लांट और फल देखकर ही पौधे खरीदें, क्योंकि गलत पौधा पूरे साल की मेहनत और कमाई पर पानी फेर सकता है.
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