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Agriculture Tips: गर्मियों में बेल वाली सब्जियों की खेती किसानों के लिए काफी लाभदायक मानी जाती है. बाजार में लौकी, तुरई, कद्दू, करेला, खीरा और टिंडा जैसी सब्जियों की मांग लगातार बनी रहती है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ के अनुसार किसान सही समय पर बुवाई, उचित दूरी, जैविक खाद और नियमित सिंचाई से अच्छी पैदावार ले सकते हैं. इन सब्जियों की खास बात यह है कि अधिकांश फसलें 40 से 60 दिनों में फल देना शुरू कर देती हैं. समय पर तुड़ाई और सही देखभाल से किसान गर्मियों के मौसम में इन फसलों से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
गर्मियों में बेल वाली सब्जियों की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा है. इन सब्जियों की मांग बाजार में लगातार बनी रहती है. किसना अधिक मुनाफा कमाने के लिए खीरा जैसी सब्जियों में लौकी, तुरई, कद्दू, करेला, खीरा, टिंडा की बुवाई कर सकते हैं. इनमें लौकी की बुवाई फरवरी से जून तक की जा सकती है. इसके लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि इसकी खेती के लिए किसान खेत की 2 से 3 बार जुताई करके उसमें सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं. बीजों को लगभग 2 से 3 सेंटीमीटर गहराई पर बोएं और पौधों के बीच 1.5 से 2 मीटर की दूरी रखें. नियमित सिंचाई और निराई-गुड़ाई आवश्यक है. लगभग 50 से 60 दिनों में फल लगने लगते हैं और 70 से 80 दिन बाद कोमल अवस्था में तुड़ाई शुरू की जा सकती है.

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के अनुसार, तुरई की बुवाई फरवरी से अप्रैल के बीच की जाती है. इसके लिए उपजाऊ और भुरभुरी मिट्टी बेहतर रहती है. खेत की तैयारी के समय गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाने से उत्पादन बढ़ता है. बीजों को मेड़ पर या कतारों में लगभग 1.5 मीटर की दूरी पर बोना चाहिए. अंकुरण के बाद कमजोर पौधों को हटा दें. किसान इस खेती में समय पर सिंचाई करें, विशेषकर फूल और फल आने के समय नमी की कमी न होने दें. इसमें 45 से 55 दिन में फल लगना शुरू हो जाता है और 60 से 70 दिन में पहली तुड़ाई की जा सकती है. नियमित तुड़ाई से लंबे समय तक उत्पादन मिलता है.

कद्दू किसानों के लिए प्रमुख रूप से फायदे का सौदा है. इसकी खेती भी गर्मियों में करना सही रहता है. इसकी बुवाई जनवरी से मार्च तक की जा सकती है. बलुई दोमट मिट्टी में इसकी पैदावार अच्छी होती है. खेत में मेड़ बनाकर 2 से 3 बीज प्रति गड्ढा बोएं और पौधों के बीच 2 से 3 मीटर की दूरी रखें ताकि बेलों को फैलने की पर्याप्त जगह मिल सके. जैविक खाद का प्रयोग लाभदायक रहता है. सिंचाई 7 से 10 दिन के अंतराल पर करें. लगभग 80 से 100 दिनों में फल पूरी तरह विकसित हो जाते हैं. जब फल का छिलका सख्त हो जाए और रंग बदलने लगे, तब कटाई करें.
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एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि करेला बुवाई फरवरी से मई के बीच की जाती है. अच्छे अंकुरण के लिए बीजों को 12 से 24 घंटे पानी में भिगोकर बोना लाभकारी रहता है. 1.5 से 2 मीटर की दूरी पर बीज बोएं और बेलों को सहारा देने के लिए मचान की व्यवस्था करें. किसना इसकी खेती में पर्याप्त धूप और जल निकासी का ध्यान रखें. इसके अलावा फूल आने और फल बनने के समय नियमित सिंचाई जरूरी है. लगभग 55 से 60 दिन में फल लगना शुरू हो जाता है और 70 से 85 दिन में पहली तुड़ाई की जाती है. फल को कोमल अवस्था में तोड़ें, इससे बाजार मूल्य अच्छा मिलता है.

खीरा की खेती आसान और मुनाफे की फसल है. खीरा की बुवाई फरवरी से अप्रैल के बीच की जाती है और यह कम अवधि में तैयार होने वाली फसल है. उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी उपयुक्त रहती है. किसान इसकी खेती में बीजों को 1 से 1.5 मीटर की दूरी पर कतारों में बोएं. खेत में नमी बनाए रखने के लिए हल्की लेकिन नियमित सिंचाई करें. कीट और रोगों की समय-समय पर निगरानी आवश्यक है. लगभग 40 से 50 दिन में फल तैयार होने लगते हैं. 50 से 60 दिन बाद पहली तुड़ाई करें और फल को हरे व कोमल अवस्था में ही बाजार भेजें.

टिंडा की बुवाई फरवरी से मार्च के बीच की जाती है और यह भी गर्मी में अच्छी पैदावार देने वाली फसल है. दोमट या बलुई दोमट मिट्टी में इसका विकास बेहतर होता है. बीजों को 1 से 1.5 मीटर की दूरी पर बोएं और अंकुरण के बाद पौधों की संख्या संतुलित रखें. नियमित निराई-गुड़ाई और सिंचाई से पौधों की वृद्धि अच्छी होती है. लगभग 45 से 60 दिन में फल तोड़ने योग्य हो जाते हैं. फलों को कोमल और हरे अवस्था में तोड़ना चाहिए. 70 से 80 दिनों तक लगातार तुड़ाई कर किसान अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं.
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