पशु वैज्ञानिक डॉ. विपिन कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि चूजों में होने वाली यह बीमारी एस्परगिलोसिस, जिसे आम भाषा में ब्रूडर निमोनिया कहा जाता है. हर साल मुर्गा पालन उद्योग को बड़ा नुकसान पहुंचाती है. यह एक फफूंद जनित बीमारी है जो चूजों के फेफड़ों पर सीधा हमला करती है.
हालांकि कहा तो यहां तक जाता है कि इस बीमारी की वजह से पिछले वर्षों में कई छोटे किसान नुकसान उठाकर व्यवसाय छोड़ने को मजबूर हुए. इसकी मुख्य वजह जागरूकता की भारी कमी है. किसानों को पता ही नहीं चलता कि नुकसान किस वजह से हो रहा है, चारा कम पड़ा या फिर मौसम का असर है, लेकिन असल सच कुछ और है.
वैज्ञानिक ने बताया ठंड में क्यों बढ़ता है खतरा?
कृषि विज्ञान केंद्र बेगूसराय के पशु वैज्ञानिक डॉ. विपिन कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि चूजों में होने वाली यह बीमारी एस्परगिलोसिस, जिसे आम भाषा में ब्रूडर निमोनिया कहा जाता है. हर साल मुर्गा पालन उद्योग को बड़ा नुकसान पहुंचाती है. यह एक फफूंद जनित बीमारी है जो चूजों के फेफड़ों पर सीधा हमला करती है. यह बीमारी सामान्यत: उन फार्मों में देखी जाती है, जहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती हो और नमी बनी रहती है. क्योंकि फॉर्म बंद होता है और हवा का आवागमन बाधित होता है. इतना ही नहीं ऐसे वातावरण में फफूंद तेजी से बढ़ती है और चूजों के सांस तंत्र में पहुंचकर संक्रमण फैलाती है.
लक्षण पहचानना क्यों मुश्किल
डॉ. विपिन बताते हैं कि चूजों में शुरुआती लक्षण किसान आसानी से नहीं पहचान पाते. बीमारी जब पकड़ में आती है, तब तक चूजों की स्थिति गंभीर हो चुकी होती है. मुख्य लक्षणों में बात करें तो चूजा खाना-पीना बंद कर देता है, मुंह खोलकर सांस लेता है, सांस लेने में धड़-धड़ या सीटी जैसी आवाज आने लगती है. कई बार चूजे को उठाने पर भी उसकी सांस लड़खड़ाती महसूस होती है. सबसे भयावह बात यह है कि इस बीमारी का अभी कोई ठोस इलाज मौजूद नहीं है. यानी एक बार चूजा संक्रमित हुआ, तो उसकी मौत लगभग तय होती है. इसी वजह से यह बीमारी मुर्गा पालकों के बीच ‘खामोश किलर’ के नाम से जानी जाती है.
क्या है बचाव?
डॉ. विपिन सलाह देते हैं कि चूजों को शुरुआती अवस्था में ही मल्टीविटामिन A और E का सप्लीमेंट दिया जाए. इससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. साथ ही फार्म में रोज धूप का प्रबंध करें, हवा का आना-जाना सुनिश्चित करें, बिछावन सामग्री हमेशा सूखी और साफ रखें, पानी और दाना के बर्तनों की सफाई नियमित रूप से करें. वे कहते हैं, इलाज नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे बड़ी औषधि है. किसान सिर्फ थोड़ी सतर्कता अपनाएं, तो 80% नुकसान को रोका जा सकता है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें
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