बेगूसराय में जमीन कारोबार को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा अब गैंगवार का रूप लेती नजर आ रही है। 9 मार्च को हुए प्रॉपर्टी डीलर वरुण सिंह हत्याकांड ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले की कड़ी अब बेगूसराय जेल से जुड़ती दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि इस हत्याकांड की साजिश जेल में बंद अपराधी संतोष सिंह ने रची थी, जिससे पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
सरेराह हुई थी वरुण सिंह की हत्या
जानकारी के अनुसार शहर के व्यस्त इलाके में दिनदहाड़े करीब डेढ़ बजे बाइक सवार अपराधियों ने प्रॉपर्टी डीलर वरुण सिंह पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। घटना के समय सड़क पर दर्जनों लोग मौजूद थे, लेकिन कोई उन्हें बचा नहीं सका। गंभीर रूप से घायल वरुण सिंह मौके पर ही तड़पते रहे और उनकी मौत हो गई, जबकि हमलावर बेखौफ होकर फरार हो गए। इस घटना ने शहर में अपराधियों के बढ़ते मनोबल पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
जमीन कारोबार में गैंगवार की आशंका
स्थानीय जानकारों के अनुसार बेगूसराय में पिछले दो दशकों से जमीन कारोबार में कई आपराधिक गिरोह सक्रिय रहे हैं। वरुण सिंह लंबे समय से इस कारोबार में प्रभाव रखते थे। ऐसे में उनकी हत्या के बाद छोटे ब्रोकरों और अन्य गिरोहों के लिए इस क्षेत्र में जगह बनाने का रास्ता खुल सकता है। माना जा रहा है कि यह हत्या जमीन कारोबार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और अदावत का परिणाम हो सकती है।
पुराने गैंगवार से जुड़ रही कड़ियां
सूत्रों के अनुसार जिस संतोष सिंह पर इस हत्याकांड की साजिश रचने का आरोप है, वह पहले भी चर्चित मुन्ना सिंह हत्याकांड में दोषी ठहराया जा चुका है और उसे आजीवन कारावास की सजा मिली है। बताया जाता है कि संतोष सिंह और उसका भाई मंतोष सिंह पहले जिले में हथियारबंद गिरोह चलाते थे। करीब दस वर्ष पहले गैंगवार में मंतोष सिंह की अत्याधुनिक हथियार से हत्या कर दी गई थी। गौरतलब है कि वर्ष 2016 में मंतोष सिंह की हत्या जिस इलाके में हुई थी, वहीं से करीब 500 मीटर की दूरी पर 9 मार्च को वरुण सिंह को निशाना बनाया गया। ऐसे में यह भी आशंका जताई जा रही है कि यह घटना पुराने गैंगवार की कड़ी का हिस्सा हो सकती है।
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जेल और खुफिया तंत्र पर उठे सवाल
इस घटना के बाद जेल प्रशासन और पुलिस के खुफिया तंत्र पर भी सवाल उठने लगे हैं। अगर मुख्य आरोपी जेल में बंद था, तो क्या साजिश जेल के अंदर से ही रची गई? क्या जेल संगठित अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनती जा रही है? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वर्षों से अत्याधुनिक हथियारों से लैस गिरोह सक्रिय रहे हैं, तो खुफिया एजेंसियां अब तक उन्हें पूरी तरह निष्क्रिय क्यों नहीं कर पाई हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां केवल शूटरों तक पहुंचती हैं या फिर पूरे आपराधिक नेटवर्क का पर्दाफाश करती हैं।
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