Bastar News: जगार के पुजारी मिटकु राम ने लोकल 18 से कहा कि जगार मां लक्ष्मी की पूजा के लिए किया जाता है. बस्तर में यह परंपरा बहुत पहले से चली आ रही है. धान रूपी लक्ष्मी की 9 दिनों तक पूजा की जाती है और घर-परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है.
बस्तर. छत्तीसगढ़ का बस्तर अपनी समृद्ध परंपरा और संस्कृति के लिए जाना जाता है. यहां आज भी लोग अपनी पुरानी परंपराओं को निभाते हैं. बस्तर में फसल कटाई के बाद लक्ष्मी जगार मनाया जाता है. इस जगार में धनुष से धुन निकालकर मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. जगार के चार प्रकार होते हैं- आठे जगार, तीजा जगार, लक्ष्मी जगार और बाली जगार. लक्ष्मी जागर में धान रूपी लक्ष्मीनारायण के विवाह से जुड़ी कथाओं का अनुष्ठान किया जाता है. यह परंपरा खेती और अनाज से जुड़ी मान्यताओं को दर्शाती है. बस्तर में लक्ष्मी जगार 9 दिन तक चलता है. गुरुमाय धनुष के माध्यम से मां लक्ष्मी का आह्वान करती हैं और उनकी पूजा करती हैं. इस दौरान वह अलग-अलग देवी-देवताओं को भी याद करती हैं. ग्रामीण इस जगार को बड़े उत्साह से मनाते हैं.
जगार के पुजारी मिटकु राम लोकल 18 को बताते हैं कि मां लक्ष्मी की पूजा के लिए यह जगार किया जाता है. बस्तर में यह परंपरा बहुत पुराने समय से चली आ रही है, इसलिए धान रूपी लक्ष्मी की 9 दिनों तक पूजा की जाती है और घर-परिवार की सुख-शांति की कामना की जाती है. इसमें लक्ष्मी और नारायण राजा का विवाह कराया जाता है और बस्तर के पारंपरिक वाद्ययंत्र मोहरी बजाई जाती है. पहले खेत से धान लक्ष्मी को प्रतीक रूप में घर लाया जाता है, फिर उनका पूजा-पाठ किया जाता है.
गीत में लक्ष्मी रानी और नारायण राजा की कथा गुरुमाय चंद्रबाई ने कहा कि वह धनुष से धुन निकालकर जगार गीत गाती हैं. इस गीत में लक्ष्मी रानी और नारायण राजा की कथा होती है. जो लोग यह गीत गाते हैं, उन्हें गुरुमाय कहा जाता है. चंद्रबाई बताती हैं कि उन्होंने यह गीत बचपन में अपने घर के लोगों से सीखा है. हांडी, धनुष और देवी-देवताओं को याद करते ही गीत याद आ जाता है. वह यह गीत बचपन से गा रही हैं.
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Rahul Singhराहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.