आईजी बस्तर सुंदरराज पी ने कहा कि आयोजन अब खेल का महाकुंभ बन चुका है. उन्होंने कहा कि इस बार लक्ष्य है कि बस्तर के सबसे अंदरूनी इलाकों से प्रतिभा बाहर आए और युवा खेल के जरिए नई पहचान बना सकें. आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि बस्तर ओलिंपिक सिर्फ स्पर्धा नहीं है. यह बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ने की प्रक्रिया का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि इस बार आयोजन में सात जिलों की सात टीमें उतरेंगी. इसके साथ ही आठवीं टीम के रूप में पुनर्वास मॉडल ‘नुआ बाट’ की विशेष टीम मैदान में आएगी. सुंदरराज पी ने कहा कि 3 लाख से अधिक युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है.
संभाग स्तरीय प्रतियोगिताएं 11 से 13 दिसंबर तक जगदलपुर में
यह ओलंपिक पहले की तरह गांव, ब्लॉक और जिला स्तर से शुरू होकर अब संभाग स्तरीय मुकाबलों में प्रवेश कर चुका है. ब्लॉक और जिला स्तर के चरण सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं. अब संभाग स्तरीय प्रतियोगिताएं 11 से 13 दिसंबर तक जगदलपुर में होंगी. बस्तर संभाग के सात जिलों की सात टीमें इस आयोजन में हिस्सेदारी कर रही हैं. इन टीमों के अलावा इस बार एक विशेष ‘आठवीं टीम’ भी जोड़ी जा रही है. यह टीम ‘नुआ बाट’ पुनर्वास मॉडल से जुड़ी है, जिसमें वे युवा शामिल होंगे जिन्होंने हाल के वर्षों में हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा अपनाई है.
एथलेटिक्स, कबड्डी, खो-खो, फुटबॉल, तीरंदाजी, बास्केटबॉल जैसे खेल
पूर्व नक्सलियों की भागीदारी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां भी विशेष तैयारी में हैं. आयोजकों का कहना है कि मैदान में शामिल हर खिलाड़ी का रजिस्ट्रेशन, सत्यापन और प्रोफाइलिंग की जा चुकी है. खेल स्थल पर सुरक्षा प्रबंध भी मजबूत किए गए हैं. इस आयोजन में एथलेटिक्स, कबड्डी, खो-खो, फुटबॉल, तीरंदाजी, बास्केटबॉल, बोरा दौड़, रस्साकशी जैसे पारंपरिक और आधुनिक खेल शामिल हैं. ग्रामीण और शहरी दोनों तरह के युवा इसमें हिस्सा लेते हैं. आयोजन का मुख्य उद्देश्य खेल के माध्यम से सामाजिक एकता बढ़ाना है.
खेल की मदद से नया जीवन शुरू कर चुके
आईजी सुंदर राज पी के अनुसार, बस्तर ओलंपिक उन युवाओं के लिए बड़ा अवसर है जिन्होंने हिंसा और डर की जिंदगी छोड़ी है. वे अब खुद को खिलाड़ी के रूप में पहचान दिलाना चाहते हैं. कई युवाओं ने कहा है कि वे अब खेल की मदद से नया जीवन शुरू कर चुके हैं. इस आयोजन को देखने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी जगदलपुर आएंगे. अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अमित शाह समापन समारोह में मौजूद रहेंगे. उनके सामने ही कई पूर्व नक्सली खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते दिखेंगे.
स्टेडियम, मंच, सुरक्षा, खिलाड़ियों की व्यवस्था और दर्शकों की सुरक्षा
अमित शाह के आगमन से पूरे आयोजन की तैयारियां तेज हो गई हैं. स्टेडियम, मंच, सुरक्षा, खिलाड़ियों की व्यवस्था और दर्शकों के लिए सीटिंग प्लान पर काम अंतिम चरण में है. जिला प्रशासन और पुलिस संयुक्त रूप से कार्यक्रम की देखरेख कर रहे हैं. बस्तर ओलंपिक लगातार तीसरे वर्ष क्षेत्र के युवाओं के लिए एक बड़ा मंच बन रहा है. गांव-गांव में इसकी चर्चा है. कई परिवारों ने कहा कि बच्चे पहली बार इतने बड़े कार्यक्रम में हिस्सा लेते देख गर्व महसूस कर रहे हैं. पूर्व नक्सलियों की भागीदारी ने इस आयोजन को और खास बना दिया है. जिन हाथों में कभी हथियार थे, वे अब खेल का साधन थामे दिखाई दे रहे हैं. यही परिवर्तन बस्तर के बदलते माहौल की बड़ी तस्वीर पेश करता है.
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