साल 2026 में बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी. पंचमी तिथि की उदयातिथि इसी दिन होने से यह पर्व विशेष फलदायी होगा. इस ‘अबूझ मुहूर्त’ पर पीले वस्त्र पहनकर मां सरस्वती की पूजा करना, नई शुरुआत, शिक्षा और कला साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है.
क्या कहते है देवघर के ज्योतिषाचार्य:
देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने बताया कि नए साल 2026 में बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी को मनाया जाएगा. ऋषिकेश पंचांग के अनुसार माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से होगी और इसका समापन अगले दिन 23 जनवरी दोपहर 2 बजकर 20 मिनट मे होगा. उदयातिथि को मान्यता देने के कारण 23 जनवरी को ही बसंत पंचमी का पर्व मनाना शुभ रहेगा.
पूजा का महत्व और विधि:
ज्योतिषाचार्य के अनुसार बसंत पंचमी के दिन छात्र-छात्राओं को सुबह स्नान कर शुद्ध मन से मां सरस्वती की पूजा करनी चाहिए. इस दिन षोडशोपचार विधि से पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है. पूजा में मां को सफेद या पीले फूल, अक्षत, पुस्तक, कलम और वाद्य यंत्र अर्पित किए जाते हैं. इससे पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है और ज्ञान की प्राप्ति होती है.
बसंत पंचमी के दिन वस्त्र और रंग का विशेष महत्व:
बसंत पंचमी के दिन पीले या सफेद वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है. पीला रंग बसंत ऋतु, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है. इसी कारण इस दिन पीले वस्त्र, पीले फूल और पीले प्रसाद का विशेष महत्व होता है.
अबुझ मुहूर्त का रहता है दिन
ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने बताया कि बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है. यानी इस दिन बिना पंचांग देखे किसी भी नए कार्य की शुरुआत की जा सकती है. शिक्षा की शुरुआत, लेखन कार्य, संगीत या कला की साधना के लिए यह दिन बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन पूजा आराधना करने के लिए पूरा दिन शुभ मुहूर्त होता है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
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