बड़वानी का केला अपनी मिठास और गुणवत्ता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहां से हर वर्ष बड़ी मात्रा में केला ईरान, इराक, इजरायल, बहरीन, तुर्की और दुबई सहित कई मध्य-पूर्वी देशों में निर्यात होता है। नर्मदा किनारे की उपजाऊ भूमि और नदी के पानी से होने वाली खेती के कारण यहां के केले का स्वाद और आकार विशेष माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय हालात का सीधा असर अब किसानों की आय पर पड़ रहा है। रमजान के महीने में सामान्यतः केले की मांग बढ़ जाती है, लेकिन इस बार बाजार में मांग कमजोर बताई जा रही है।
कीमतों में आई बड़ी गिरावट
किसान महेश राठौड़ ने बताया कि उन्होंने छह एकड़ जमीन में केले की फसल लगाई, जिस पर प्रति एकड़ 85 से 90 हजार रुपए खर्च आए और कुल लागत पांच लाख रुपए से अधिक हो गई। कुछ समय पहले तक केले का भाव 22 से 25 रुपए प्रति किलोग्राम मिल रहा था, जो अब घटकर 8 से 9 रुपए प्रति किलोग्राम रह गया है। बलराम यादव ने बताया कि फसल तैयार होने के बावजूद उचित भाव नहीं मिल रहा है और लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
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बंदरगाहों पर अटका निर्यात का माल
केला उत्पादक और निर्यातक संतोष लछेटा ने बताया कि बड़वानी से केले का निर्यात वर्ष 2016 से शुरू हुआ था और पिछले वर्ष लगभग 1.6 लाख टन केला निर्यात किया गया। इस वर्ष जिले में लगभग ढाई से तीन करोड़ केले के पौधे लगाए गए हैं। युद्ध के कारण कीमतों में गिरावट आई है और 2000 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल मिलने वाला भाव अब 1200 से 1300 रुपए तक रह गया है।
राजलक्ष्मी बनाना ग्रुप के जितेंद्र सोलंकी के अनुसार मुंबई के शिपयार्ड में लगभग 15 से 20 दिन का केला स्टॉक पड़ा है। महाराष्ट्र के सोलापुर के निर्यातक किरण ढोके ने बताया कि मुंबई पोर्ट पर लगभग 250 कंटेनर केले से भरे खड़े हैं और उन पर लगातार पोर्ट चार्ज लग रहा है।
किसानों और व्यापारियों को नुकसान
किसान नितिन यादव ने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में जिले के कुल उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा निर्यात हो जाता है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं। लेकिन इस बार निर्यात बंद होने से किसानों और निर्यातकों दोनों को नुकसान हो रहा है। किसान मनोज जाट के अनुसार बड़वानी में हजारों किसान जी-9 किस्म के केले की खेती करते हैं, जिसकी विदेशों में अधिक मांग रहती है।
बड़वानी विधायक राजन मंडलोई ने कहा कि नर्मदा पट्टी का केला अपनी मिठास और आकार के कारण अरब देशों में काफी पसंद किया जाता है, लेकिन युद्ध के कारण मुंबई पोर्ट पर बड़ी मात्रा में केला फंसा हुआ है।
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