महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार की 28 जनवरी को प्लेन क्रैश में मौत हो गई। उनके अलावा कैप्टन सुमित कपूर, को-पायलट कैप्टन शंभवी पाठक, फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली और अजित पवार के सुरक्षा गार्ड विदिप जाधव की भी जान चली गई। प्लेन की कमान 62 साल के कैप्टन सुमित के हाथों में थी। उनका गुरुवार को दिल्ली के पंजाबी बांग में अंतिम संस्कार किया गया। NDTV के मुताबिक, इस दौरान उनके दोस्तों ने बताया कि हादसे वाले दिन प्लेन उड़ाने की ड्यूटी सुमित की नहीं थी। प्लेन का पायलट ट्रैफिक में फंसा था। हादसे से सिर्फ कुछ घंटे पहले सुमित को ऑर्डर मिला कि उन्हें मुंबई से बारामती तक अजित पवार को चुनावी रैली के लिए ले जाना है। सुमित सीनियर और अनुभवी पायलट थे। उनके पास करीब 20,000 घंटे उड़ान का एक्सपीरिएंस था। हाथ में पहने ब्रैसलेट से शव की पहचान हुई 28 जनवरी की सुबह करीब 8 बजे, कपूर ने लियरजेट 45 प्लेन से उड़ान भरी। यह विमान दिल्ली की कंपनी VSR वेंचर्स का था। करीब 8:45 बजे, बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान हादसा हो गया। शव इतनी बुरी तरह जल चुके थे कि पहचानना मुश्किल था। NDTV के मुताबिक, सुमित के शव की पहचान उनके हाथ में पहने ब्रैसलेट से हुई। परिवार ने बताया कि सुमित ने स्प्रिंगडेल्स और एयरफोर्स बाल भारती से पढ़ाई की थी। इसके बाद कनाडा में एडवांस फ्लाइट ट्रेनिंग ली। दूसरे पायलटों को ट्रेनिंग देते थे सुमित 1990 के दशक में वे सहारा एयरलाइंस से जुड़े। उन्हें कंपनी चेयरमैन का भरोसेमंद माना जाता था। सुमित ने सहारा एयरलाइंस के बाद जेट एयरवेज में सेवाएं दी। उनका काम इतना अच्छा था कि उन्हें बोइंग 737 का एग्जामिनर नियुक्त किया गया। एक सीनियर कैप्टन के मुताबिक- एग्जामिनर बनना सिविल एविएशन में बड़ी उपलब्धि होती है। यह काफी सीनियर पद है। बतौर एग्जामिनर सुमित दूसरे पायलटों की ट्रेनिंग और प्रोफिशिएंसी के लिए जिम्मेदार थे। वे पिछले पांच सालों से VSR एविएशन के साथ काम कर रहे थे। कुछ दिन पहले ही हॉन्गकॉन्ग से लौटे थे कपूर सुमित के एक और दोस्त ने बताया कि कपूर कुछ दिन पहले ही हॉन्गकॉन्ग से लौटे थे। वहां से लौटने के बाद कपूर ने उनसे काफी देर तक बात की थी और उन्हें अपनी सेहत का खास ख्याल रखने की सलाह दी थी। सुमित के दोस्तों ने इस बात को सिरे से नकार दिया कि पायलट की चूक के कारण हादसा हो सकता है। उन्होंने कहा कि सुमित काफी पायलट थे। उनके पास 20 हजार घंटे उड़ान का एस्पीरिएंस था। ऐसे में उनसे गलती होने की संभावना लगभग ना के बराबर थी। नए घर में शिफ्टिंग, शादी की तैयारियां चल रही थीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुमित के परिवार की जड़ें यूपी के मुरादाबाद से जुड़ी हैं। हालांकि, वे 40 सालों से दिल्ली में रहे। उन्हें लोग प्यार से ‘बनी’ पुकारते थे। पड़ोसियों ने बताया कि उन्होंने ‘बनी’ को एक चंचल बच्चे से अनुभवी कैप्टन बनते देखा था। सुमित अपने पीछे पत्नी, बुजुर्ग पिता, बेटे शिव और बेटी सान्या को छोड़ गए हैं। सुमित के बेटे और दामाद भी पायलट हैं। परिवार जल्द ही अपने नए घर में शिफ्ट होने की तैयारी कर रहा था, लेकिन उससे पहले ही यह हादसा हो गया। फरवरी में सुमित के बेटे की शादी तय थी। परिवार तैयारियों में जुटा था। सुमित अप्रैल में 63 साल के होने वाले थे। वे दो-तीन साल में रिटायर होकर सुकून भरी जिंदगी की बात कर रहे थे। अब उनकी अचानक मौत से परिवार शोक में डूबा है।
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