जिले में पुलिस की कड़ाई से ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ मामलों में कमी आई है, जिससे सड़क हादसों में भी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, शराब की खपत में वृद्धि चिंता का विषय बनी हुई है। पिछले 11 महीनों में, जिले में शराब पीकर वाहन चलाने (ड्रिंक एंड ड्राइव) के 1,112 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 1,019 मामलों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है।
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 के तहत, ऐसे मामलों में न्यूनतम 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। इस सख्ती के परिणामस्वरूप, केवल ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ मामलों से ही 1 करोड़ 1 लाख 90 हजार रुपये का राजस्व वसूला गया है। पुलिस की लगातार कार्रवाई का सीधा असर सड़क हादसों के आंकड़ों पर देखा गया है। साल 2024 की तुलना में, जनवरी से नवंबर 2025 तक सड़क दुर्घटनाओं, घायलों की संख्या और मौतों में कमी आई है।
साल 2024: 332 सड़क हादसे, 203 घायल, 222 मौतें। जनवरी से नवंबर 2025 तक 284 सड़क हादसे, 233 घायल, 190 मौतें हुईं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) विश्वदीप त्रिपाठी ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ पर कड़ाई से हादसों और मृत्यु दर में कमी आई है, जो सुरक्षा को प्राथमिकता देने का परिणाम है।
शराब की खपत में चिंताजनक वृद्धि
हालांकि, सड़क सुरक्षा के मोर्चे पर सकारात्मक परिणाम मिले हैं, वहीं शराब की खपत में कमी आने के बजाय तेजी से वृद्धि देखी गई है। जिले में संचालित पांच मदिरा दुकानों—बलरामपुर, राजपुर, वाड्रफनगर, रामानुजगंज और कुसमी से हर महीने करोड़ों रुपये की शराब की बिक्री हो रही है।
अक्टूबर 2024 में जहां शराब की बिक्री 2,59,93,350 रुपये थी, वहीं अक्टूबर 2025 में यह बढ़कर 3,65,86,130 रुपये हो गई, जो 1,05,92,780 रुपये की सीधी वृद्धि दर्शाती है।
सात महीनों में 6.24 करोड़ की बढ़ोतरी
आबकारी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच शराब की बिक्री में एक बड़ी छलांग देखी गई है। अप्रैल-अक्टूबर 2024 में जहां बिक्री 18,83,80,250 रुपये थी, वहीं अप्रैल-अक्टूबर 2025 में यह 25,08,67,300 रुपये पर पहुंच गई। यह 6,24,89,050 रुपये की उल्लेखनीय बढ़ोतरी है।
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