इस प्रथम राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जंबूरी में 13 हजार से अधिक रोवर्स और रेंजर्स ने भाग लिया है. युवाओं ने एक अस्थायी लेकिन सुव्यवस्थित ‘जंबूरी शहर’ बसाकर यह साबित कर दिया कि जब जिम्मेदारी और अवसर युवाओं को दिए जाते हैं, तो वे असंभव को भी संभव बना सकते हैं. पूरे आयोजन स्थल पर अनुशासन, स्वच्छता, आपसी सहयोग और सेवा भाव की झलक साफ नजर आ रही है.
युवाओं, संस्कृतियों और विविधताओं का संगम
उत्तर प्रदेश के बरेली से आए रोवर कवि सचिन पटेल ने बताया कि यह भारत में पहली बार आयोजित हो रही नेशनल रोवर–रेंजर जंबूरी है. इससे पहले लखनऊ में 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी आयोजित हो चुकी है, लेकिन यह जंबूरी अपने आप में खास है. उन्होंने कहा कि जंबूरी सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं, संस्कृतियों और विविधताओं का संगम है. यहां देश के अलग-अलग राज्यों से आए प्रतिभागी एक-दूसरे की भाषा, संस्कृति और खान-पान को जानने और समझने का अवसर पा रहे हैं. सचिन ने बताया कि वे कक्षा 6 से स्काउट-गाइड से जुड़े हैं, बीएड कर चुके हैं और यह उनकी तीसरी जंबूरी है. उनके ब्लेजर पर लगे बैज उनके अब तक के सभी अचीवमेंट का प्रतीक हैं.
खाने-पीने की व्यवस्था बेहतरीन
दिल्ली से आए सुमित चौहान ने कहा कि छत्तीसगढ़ आकर उन्हें बेहद अच्छा अनुभव हो रहा है. उन्होंने बताया कि जितनी सुविधाओं की उम्मीद थी, उससे कहीं बेहतर व्यवस्थाएं यहां देखने को मिली हैं. साथ आए बच्चे सभी गतिविधियों में उत्साहपूर्वक हिस्सा ले रहे हैं. वहीं दिल्ली के ही प्रिंस गहलोत ने कहा कि दिल्ली की तुलना में छत्तीसगढ़ में ठंड कम महसूस हो रही है और खाने-पीने की व्यवस्था बेहतरीन है. वे पिछले 8 वर्षों से स्काउटिंग से जुड़े हुए हैं.
बिहार से आईं खुशी कुमारी ने हाथ में ठेकुआ, मूली और सेब दिखाते हुए बताया कि ये छठ पूजा के व्रत में विशेष महत्व रखते हैं. उन्होंने कहा कि इस जंबूरी के माध्यम से वे पहली बार बिहार की संस्कृति को देशभर के लोगों के सामने प्रस्तुत कर रही हैं. बिहार से कुल 24 लोग इस आयोजन में शामिल हुए हैं और छत्तीसगढ़ की व्यवस्थाओं से वे काफी प्रभावित हैं.
हरियाणा के गुरुग्राम से आई अंशिका ने बताया कि उनके दल में 37 लोग शामिल हैं और यह उनकी पहली जंबूरी है. उन्होंने कहा कि यहां का प्राकृतिक सौंदर्य बेहद मनमोहक है और अलग-अलग राज्यों से आए लोगों से बातचीत कर अच्छा लग रहा है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पहले उन्हें छत्तीसगढ़ को लेकर कुछ गलत धारणाएं थीं, लेकिन यहां आकर समझ में आया कि छत्तीसगढ़ शांत, सुंदर और संस्कृतियों से भरपूर राज्य है. उन्होंने गर्व से कहा, ‘छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया’
कर्नाटक से आए करण और अर्जुन ने बताया कि उनके राज्य में इतनी ठंड नहीं पड़ती, लेकिन छत्तीसगढ़ के मौसम के साथ वे खुद को ढाल रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह उनकी पहली नेशनल जंबूरी है और यहां सभी राज्यों की वेशभूषा, नृत्य और गतिविधियों में भाग लेकर उन्हें काफी आनंद आ रहा है.
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