देवघर में द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ धाम में सदियों पुरानी हरि-हर मिलन की परंपरा मंगलवार को निभाई जाएगी। सोमवार को सरदार पंडा गुलाब नंद ओझा ने बाबा बैद्यनाथ पर गुलाल अर्पित कर होली उत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अबीर-गुलाल अर्पित कर उत्सव में हिस्सा लिया। इससे पूर्व मंदिर प्रशासनिक भवन स्थित राधा-कृष्ण मंदिर से भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिमा को सुसज्जित पालकी में विराजमान कर मंदिर की परिक्रमा कराई गई। पालकी पश्चिम द्वार से नगर भ्रमण के लिए निकली। ढोल-नगाड़ों की गूंज और “जय कन्हैया लाल की” के जयकारों से पूरा शहर भक्तिमय हो गया। चौक-चौराहों पर मालपुआ का भोग लगाकर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। नगर भ्रमण के बाद पालकी को आजाद चौक स्थित दोल मंच पर लाया गया, जहां राधा-कृष्ण की प्रतिमा को झूले पर विराजमान कर भंडारी द्वारा झूला झुलाया गया। देर रात शुभ मुहूर्त में होलिका दहन की विशेष पूजा संपन्न होगी। मंगलवार सुबह 5:11 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुति दी जाएगी। होलिका दहन के बाद राधा-कृष्ण की प्रतिमा को पुनः पालकी में बैठाकर बाबा मंदिर लाया जाएगा। राधा रानी को प्रशासनिक भवन स्थित मंदिर में स्थापित किया जाएगा, जबकि श्रीहरि को सीधे बाबा मंदिर के गर्भगृह में ले जाकर बाबा बैद्यनाथ से मिलन कराया जाएगा। इसी क्षण हरि-हर मिलन की परंपरा पूरी होगी। शास्त्रों के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु द्वारा बाबा बैद्यनाथ की स्थापना की गई थी।
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