Uttarayani Mela 2026: उत्तरायणी मेला 2026 से पहले बागेश्वर शहर को खास अंदाज में सजाया जा रहा है. शहर की दीवारों पर कुमाऊं की लोकसंस्कृति और पहाड़ी जीवनशैली को रंगों के जरिए उकेरा गया है. यह पहल बागेश्वर की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन आकर्षण को नई मजबूती दे रही है.
हर्ष आर्ट गैलरी की स्टुडेंट गायत्री पांडे ने लोकल 18 को बताया कि सरयू नदी घाट, नुमाइश मैदान, बागनाथ मंदिर परिसर और शहर के प्रमुख मार्गों की दीवारों को विशेष रूप से चयनित किया गया है. इन स्थानों पर वॉल पेंटिंग्स में कुमाऊंनी लोक नृत्य, ढोल-दमाऊ, छोलिया नृत्य, देवी-देवताओं की झलक, पारंपरिक वेशभूषा में पहाड़ी महिलाएं, खेतों में काम करते ग्रामीण, पहाड़ों की सीढ़ीनुमा खेती और हिमालय की प्राकृतिक छटा को जीवंत रूप में दर्शाया जा रहा है. इन चित्रों में पहाड़ की सादगी, मेहनत और प्रकृति से जुड़ा जीवन साफ तौर पर नजर आ रहा है.
पर्यटन और संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा
नगरपालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल ने कहा कि उत्तरायणी मेला केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन ही नहीं, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है. ऐसे में शहर की दीवारों पर बनी ये कलाकृतियां देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगी. पर्यटक इन चित्रों के माध्यम से कुमाऊं की लोकसंस्कृति, रीति-रिवाज और पहाड़ी जीवन को करीब से देख और महसूस कर सकेंगे.
लोगों में दिखा जबरदस्त उत्साह
स्थानीय लोगों में भी इस पहल को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. उनका कहना है कि इससे न केवल शहर की सुंदरता बढ़ी है, बल्कि बागेश्वर की पहचान भी और मजबूत हुई है. उत्तरायणी मेले के दौरान जब हजारों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक बागेश्वर पहुंचेंगे, तब ये दीवार चित्र उनके लिए यादगार अनुभव बनेंगे. उम्मीद की जा रही है कि इस प्रयास से बागेश्वर को सांस्कृतिक और पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान मिलेगी.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
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