पहाड़ की होली में दो ऐसे किरदार होते हैं, जिनके अचानक आगमन से माहौल में हंसी और उत्साह की लहर दौड़ जाती है. महिलाओं की होली में महिलाएं पुरुषों का वेश धारण करती हैं, कोई फौजी बनती है, तो कोई बूढ़े दादा का रूप ले लेती है. वहीं पुरुषों की होली में पुरुष महिलाएं बनकर सजते हैं. वे घाघरा-चोली, दुपट्टा और गहनों जैसे परिधान पहनकर नृत्य करते हैं. इन किरदारों को कई जगह ‘नकटा’ या ‘स्वांग’ के रूप में भी जाना जाता है.
आदमी औरत की नहीं कर पाएंगे पहचान
स्थानीय जानकार प्रमोद जोशी ने लोकल 18 को बताया कि पहाड़ की होली में दो ऐसे किरदार होते हैं, जिनके अचानक आगमन से माहौल में हंसी और उत्साह की लहर दौड़ जाती है. महिलाओं की होली में महिलाएं पुरुषों का वेश धारण करती हैं, कोई फौजी बनती है, तो कोई बूढ़े दादा का रूप ले लेती है. वहीं पुरुषों की होली में पुरुष महिलाएं बनकर सजते हैं. वे घाघरा-चोली, दुपट्टा और गहनों जैसे परिधान पहनकर नृत्य करते हैं. इन किरदारों को कई जगह ‘नकटा’ या ‘स्वांग’ के रूप में भी जाना जाता है. यह एक तरह की लोक-नाट्य परंपरा है, जिसका उद्देश्य लोगों को हंसाना और सामाजिक संदेश देना होता है.
क्यों बनते हैं आदमी औरत
होली को सामाजिक बंधनों से मुक्ति का त्योहार माना जाता है. इस दिन लोग मजाक, व्यंग्य और अभिनय के माध्यम से समाज की कुरीतियों पर भी हल्का-फुल्का कटाक्ष करते हैं. पुरुषों का महिला बनना और महिलाओं का पुरुष बनना प्रतीक है समानता और खुलापन का. यह दिखाता है कि त्योहार के दिन हर व्यक्ति अपने दायरे से बाहर निकलकर खुलकर जी सकता है. कुमाऊं के कई गांवों में इसे ‘नाटकीय होली’ भी कहा जाता है. यहां अलग-अलग पात्रों का अभिनय किया जाता है, जैसे फौजी, बूढ़ा दादा, बनिया, पंडित या नाचने वाली. इन पात्रों के जरिए हास्य-व्यंग्य प्रस्तुत किया जाता है. होली के दौरान जब ये पात्र अचानक से समूह के बीच पहुंचते हैं, तो माहौल में कौतूहल और उत्साह बढ़ जाता है. ढोलक की थाप तेज हो जाती है और होलियार ठहाके लगाते हैं.
संस्कृति को जीवित रखती परंपरा
आज भी बागेश्वर और कुमाऊं के कई इलाकों में यह परंपरा जीवित है. यह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति को संजोने का माध्यम है. यही वजह है कि उत्तराखंड की होली देखने दूर-दूर से लोग आते हैं, और इस अनोखी नाटकीय अंदाज का आनंद लेते हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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