बागेश्वर: जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार होम-स्टे योजनाओं को लगातार आगे बढ़ा रही है. इन योजना के तहत बागेश्वर के पांच प्रमुख पहाड़ी इलाकों बैजनाथ, कौसानी, कपकोट, खाती और लीती गांव में होम-स्टे खोला जा सकता है.
बागेश्वर: उत्तराखंड सरकार बागेश्वर जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए होम-स्टे योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रही है. पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार के सीमित साधनों को देखते हुए यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित हो रही है. सरकार का उद्देश्य है कि लोग अपने गांव में रहकर ही आय अर्जित कर सकें और पलायन की समस्या पर रोक लगे. होम-स्टे के माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, खानपान और जीवनशैली से जुड़ने का अवसर मिलता है, वहीं ग्रामीणों को स्थायी आमदनी का जरिया मिलता है. बागेश्वर जिला इस योजना के लिए बेहद उपयुक्त माना गया है.

बैजनाथ क्षेत्र धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है. यहां स्थित प्राचीन बैजनाथ मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है. ऐसे में इस क्षेत्र में होम-स्टे खोलना बेहद लाभकारी साबित हो सकता है. श्रद्धालु अक्सर शांत और घरेलू वातावरण में ठहरना पसंद करते हैं, जिससे होम-स्टे की मांग बढ़ रही है. स्थानीय लोग अपने घरों के खाली कमरों को सुसज्जित कर पर्यटकों के लिए खोल सकते हैं. इससे न केवल अतिरिक्त आय होगी, बल्कि स्थानीय युवाओं को भी रोजगार मिलेगा. सरकार इस क्षेत्र में होम-स्टे खोलने वालों को प्राथमिकता के आधार पर सहायता उपलब्ध करा रही है.

कौसानी विश्व प्रसिद्ध हिल स्टेशन है, जहां से नंदा देवी, त्रिशूल और पंचाचूली जैसी हिमालयी चोटियों के अद्भुत दृश्य दिखाई देते हैं. यही कारण है कि यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. होटल के विकल्पों के साथ-साथ अब पर्यटक होम-स्टे में ठहरना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. कौसानी में होम-स्टे खोलने से स्थानीय लोगों को अच्छा खासा मुनाफा मिल सकता है. सरकार इस क्षेत्र को पर्यटन हब के रूप में विकसित कर रही है, और होम-स्टे संचालकों को सब्सिडी और लोन की सुविधा दे रही है.
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कपकोट और खाती गांव ट्रैकिंग और एडवेंचर टूरिज्म के लिए तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. पिंडारी, कफनी और सुंदरढूंगा ग्लेशियर ट्रैक पर जाने वाले पर्यटक इन इलाकों में रुकते हैं. ऐसे में यहां होम-स्टे की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं. ट्रैकर्स और एडवेंचर प्रेमी स्थानीय घरों में ठहरकर पहाड़ी जीवन का अनुभव लेना चाहते हैं. होम-स्टे के जरिए स्थानीय लोग गाइडिंग, भोजन और अन्य सेवाओं से भी अतिरिक्त आय कमा सकते हैं. सरकार इन दूरस्थ क्षेत्रों में होम-स्टे खोलने के लिए विशेष प्रोत्साहन दे रही है.

लीती गांव ग्रामीण पर्यटन के लिए एक उभरता हुआ क्षेत्र है. यहां पर्यटक पारंपरिक पहाड़ी संस्कृति, लोकजीवन और खानपान को करीब से देख सकते हैं. शहरी जीवन की भागदौड़ से दूर शांति की तलाश में आने वाले पर्यटकों के लिए लीती गांव एक बेहतर विकल्प बनता जा रहा है. यहां होम-स्टे खोलने से गांव के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा. महिलाएं भी पारंपरिक भोजन और हस्तशिल्प के जरिए आय अर्जित कर सकती हैं. सरकार ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ऐसे गांवों में होम-स्टे को विशेष सहायता दे रही है.

उत्तराखंड सरकार विभिन्न योजनाओं के तहत होम-स्टे खोलने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है. दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास विकास योजना के तहत मैदानी क्षेत्रों में परियोजना लागत का 25 प्रतिशत, अधिकतम 7.5 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है. वहीं पहाड़ी क्षेत्रों के लिए वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना के तहत 33 प्रतिशत तक, अधिकतम 15 लाख रुपये तक की सहायता मिलती है. इसके अलावा पांच साल तक ब्याज सब्सिडी के रूप में सालाना एक लाख रुपये तक का लाभ भी दिया जाता है.

होम-स्टे खोलने के इच्छुक लोगों के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) भी एक बड़ा सहारा है. इस योजना के तहत 20 लाख रुपये तक का लोन लिया जा सकता है. लोन की राशि का उपयोग कमरों के निर्माण, साज-सज्जा, फर्नीचर और अन्य सुविधाओं के लिए किया जा सकता है. सब्सिडी और लोन की सुविधा मिलने से कम लागत में व्यवसाय शुरू करना आसान हो गया है. सरकार और पर्यटन विभाग द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाता है, जिससे होम-स्टे का संचालन बेहतर तरीके से किया जा सके.

होम-स्टे योजना बागेश्वर जिले में पलायन रोकने का एक मजबूत माध्यम बन रही है. गांव में रहकर ही अच्छी आय होने से युवाओं को शहरों की ओर जाने की मजबूरी नहीं रहेगी. इससे न केवल आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि गांवों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान भी मजबूत होगी. पर्यटन से जुड़ी यह पहल स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. आने वाले समय में बागेश्वर के पहाड़ी इलाके होम-स्टे के जरिए रोजगार और पर्यटन का नया मॉडल बन सकते हैं.
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