भस्म आरती में विशेष श्रृंगार
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि पौष मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर परंपरा अनुसार सुबह 4 बजे भस्म आरती संपन्न हुई। वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए और गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का विधिवत पूजन किया गया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से किया गया।
पूजन के दौरान प्रथम घंटाल के साथ हरि ओम का जल अर्पण किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को नवीन मुकुट धारण कराया गया। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के बीच भस्म आरती संपन्न हुई। आज के श्रृंगार की विशेषता यह रही कि बाबा महाकाल का भांग से श्रृंगार कर चांदी के बेलपत्र से सजाया गया और भस्म रमाई गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं।
नए साल 2026 की शुरुआत उज्जैन में ऐतिहासिक आस्था के साथ हुई। 1 जनवरी को भगवान महाकालेश्वर के दर्शन के लिए रिकॉर्ड 6.12 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। यह आंकड़ा अब तक का सर्वाधिक है। नववर्ष के अवसर पर सुबह 4 बजे विशेष भस्म आरती आयोजित की गई, जिसमें 10 हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए। दिनभर मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंजता रहा।
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इतनी भारी भीड़ को देखते हुए उज्जैन कलेक्टर रौशन सिंह और मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक सहित पूरी प्रशासनिक टीम रात 2 बजे से ही सक्रिय रही। सहायक प्रशासक आशीष फलवाडिया ने बताया कि शयन आरती तक दर्शनार्थियों की संख्या 6.12 लाख तक पहुंच चुकी थी। सटीक मॉनिटरिंग और बेहतर प्रबंधन के चलते दर्शन व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित होती रही। शनिवार को भी लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचे।
आठ दिनों में 19.55 लाख श्रद्धालु
क्रिसमस की छुट्टियों और साल के अंतिम सप्ताह के कारण पिछले आठ दिनों में लगातार भारी भीड़ देखने को मिली।
26 दिसंबर – 1,98,052
27 दिसंबर – 1,96,322
28 दिसंबर – 1,95,688
29 दिसंबर – 1,75,473
30 दिसंबर – 1,66,303
31 दिसंबर – 1,53,742
1 जनवरी – 6,12,000
कुल – 19.55 लाख श्रद्धालु
2026 ने बनाया नया कीर्तिमान
पिछले वर्षों की तुलना में 2026 में नया रिकॉर्ड बना है।
2024 (1 जनवरी) – 4.5 लाख
2025 (1 जनवरी) – 5.0 लाख
2026 (1 जनवरी) – 6.12 लाख (सर्वाधिक)
आरती का समय
प्रथम भस्म आरती: प्रातः 4 से 6 बजे
द्वितीय दद्योतक आरती: प्रातः 7:30 से 8:15 बजे
तृतीय भोग आरती: प्रातः 10:30 से 11:15 बजे
चतुर्थ संध्याकालीन पूजन: सायं 5:00 से 5:45 बजे
पंचम संध्या आरती: सायं 6:30 से 7:15 बजे
शयन आरती: रात्रि 10:30 से 11:00 बजे
(यह क्रम फाल्गुन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तक रहेगा।)
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