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पुजारियों और पुरोहितों ने इस दौरान बाबा महाकाल का आकर्षक स्वरूप मे शृंगार कर कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को नवीन मुकुट धारण कराया, जिसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई और फिर झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्मारती हुई। आज के शृंगार की विशेषता यह थी कि आज बाबा महाकाल का त्रिपुंड, चन्द्रमा और बेल पत्र के साथ ही त्रिनेत्र से भांग का शृंगार कर बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। आज बाबा महाकाल के त्रिनेत्र स्वरूप के दर्शनों का लाभ हजारो भक्तों ने लिया और जय श्री महाकाल का जयघोष भी किया। मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान निराकार से साकार स्वरूप मे दर्शन देते हैं।
चंद्रग्रहण के चलते श्री महाकालेश्वर मंदिर की व्यवस्था में बदलाव
3 मार्च 2026, मंगलवार (फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा) को श्री महाकालेश्वर मंदिर की प्राचीन परंपरा अनुसार चंद्रग्रहण के कारण श्री महाकालेश्वर मंदिर की पूजा पद्धति में परिवर्तन रहेगा। शाम 6:32 से 6:46 तक रहने वाले इस 14 मिनट के ग्रहण का वेद काल सुबह सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा। वेद काल के कारण सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया जाएगा। ग्रहण समाप्त होने के पश्चात मंदिर में शुद्धिकरण, भगवान का स्नान पूजन के पश्चात भोग अर्पित कर संध्या आरती संपन्न की जाएगी।
भस्म आरती– फोटो : credit
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