राजिम से 10 और रायपुर से करीब 52 किलोमीटर दूर स्थित खपरी दूधकईया गांव में हुए 1 फरवरी की रात के दंगों के बाद 15 परिवारों के 52 सदस्य पिछले 40 दिनों से मुस्लिम हॉल बैजनाथपारा में शरणार्थी का जीवन जी रहे हैं। दंगों ने इनके घर छीन लिए। बच्चों की परीक्षाएं छूट गई। शादी और दूसरी जरूरतों के लिए रखे जेवर चोरी हो गए। गांव में घरों की हालत ऐसी हो गई है कि अब वहां न बिजली है और न ही पानी की व्यवस्था। हॉल में रहने वाली महिलाएं, बच्चे और युवाओं को ये भी नहीं पता कि उनकी घर वापसी हो पाएगी या नहीं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस मामले में अभी तक एक बार भी गरियाबंद पुलिस या प्रशासन ने इन लोगों को वापस घर पहुंचाने की कोई पहल नहीं की है। दंगों के बाद भारी पुलिस सुरक्षा में इन परिवारों को रायपुर लाया गया था। एक साथ ज्यादा सदस्य होने की वजह से लोगों को मुस्लिम हॉल बैजनाथपारा में रखा गया है। समाज का हॉल होने की वजह से यह कोई किराया नहीं लग रहा है। लोगों की मदद के लिए कई सामाजिक संगठन और हर धर्म के लोग पहुंचे। किसी ने राशन दिया तो किसी ने कपड़े। दंगे में अपना सबकुछ गंवा चुके लोगों के पास कुछ भी नहीं था। मदद के लिए हाथ बढ़ते गए। लेकिन वहां रहने वाले लोग अब भी परेशान हैं। आखिर ये मदद कब तक मिलती रहेगी। अपने घर जा पाएंगे या नहीं। ये सवाल सभी को रह-रहकर परेशान कर रहा है। आंखों में आंसू और चेहरे में उदासी लिए लोग सुबह से रात तक ज्यादा बाहर नहीं जाते। आपस में ही एक-दूसरे को हिम्मत दिलाते रहते हैं। हमारे पास तो कुछ भी नहीं बचा, जिंदगीभर की कमाई भी गंवा दी
दंगे से प्रभावित छोटे खान, महमूद कुरैशी, सईदा बेगम, फातिमा बी, नौरेन बी, सलीम खान, राजू खान, अनस खान और बल्ला खान ने बताया कि दंगे की वजह से उनकी जिंदगी भर की कमाई चली गई। जेवर चोरी हो गए। घरों की हालत ऐसी हो गई है कि रहना मुश्किल हो गया है। कलेक्टर साहब का कहना है कि हम कोई मुआवजा नहीं दे सकते हैं। हमारी तो पहचान भी खो गई है। आधार कार्ड समेत सभी कागज जल गए हैं। जमीन के कागजात थे वे भी जल गए। हमें तो कुछ भी समझ नहीं आता कि आखिर आगे जिंदगी कैसे जीएंगे। घरों में अंधेरा है। बिजली-पानी सब कट गया है। रायपुर में भी लोग कब तक मदद करेंगे। कई सामाजिक संस्थानों ने इनकी मदद के लिए शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद फंड भी इकट्ठा किया है। इसमें कई समाज के लोगों ने बड़ी भागीदारी की। जो भी इनकी मदद करना चाहता है वे सीधे मुस्लिम हॉल बैजनाथपारा में इनसे संपर्क कर सकते हैं। बच्चे बोले- परीक्षा देनी थी पर किताबें भी जल गई हैं मुस्लिम हॉल में रह रही आठवीं कक्षा की छात्रा आरिफा कुरैशी, आसिफा कुरैशी, आरजू खान, निखत कुरैशी, तमन्ना खान और छठवीं पढ़ रही नूरी खान, नवीं पढ़ रही सुल्ताना खान ने बताया कि पिछले महीने उनकी वार्षिक परीक्षाएं थी। घरों में रहकर तैयारी कर रहे थे। लेकिन अचानक सब बदल गया। घर छोड़ना पड़ा। परीक्षा भी नहीं दे पाए। गांव के ही स्कूल के दूसरे बच्चों से पता किया तो पता चला कि सभी परीक्षाएं हो गई हैं। अब तो पूरा साल खराब हो गया है। पता नहीं घर कब जाएंगे। हमारी किताबें, बस्ते, ड्रेस सब जल गए हैं। हमारे पास तो पढ़ाई के लिए कुछ भी नहीं बचा।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.