केंद्र सरकार नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर जानलेवा हमले की जांच कराएगी। वीरवार को राज्यसभा में ये मुद्दा गूंजने पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भरोसा दिलाया कि सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से ले रही है।
बुधवार देर रात जम्मू में एक शादी समारोह से लौटते वक्त फारूक पर कमल सिंह जम्वाल ने पिस्टल से पीछे से फायरिंग की थी। इसमें वे बाल-बाल बचे थे। आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया गया। अदालत में पेशी के बाद उसे पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। मामले की जांच डीआईजी रैंक के अधिकारी को साैंपी गई है।
फारूक पर हमले को लेकर जम्मू-कश्मीर समेत देश भर के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जम्मू में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। रोष रैलियां निकालीं। राज्यसभा में भी यह मुद्दा गूंजा। सदन में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कार्यवाही शुरू होते ही यह मुद्दा उठाया और कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा खतरे में है। जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा खत्म किए जाने से उनकी सुरक्षा खतरे में आ गई। जब स्थानीय सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था पहले राज्य सरकार के पास थी, तब ऐसी कोई घटना नहीं हो सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अब सुरक्षा की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय के हाथों में आने से राज्य की यह स्थिति हो गई है। कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और महत्वपूर्ण नेताओं को खत्म करने की साजिश रची जा रही है।
सदन में इन चिंताओं पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार फारूक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी। उन पर जानलेवा हमला गंभीर चिंता का विषय है। केंद्र सरकार इसे गंभीरता से ले रही है और पूरी जांच की जाएगी। नड्डा ने कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण करना उचित नहीं है। यह निष्कर्ष निकालना कि घटना जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा खत्म किए जाने के कारण हुई…और यह आरोप लगाना कि किसी तरह उनकी हत्या की साजिश रची जा रही है… निंदनीय है।
पुलिस आरोपी के संपर्कों की तलाश में जुटी
63 वर्षीय आरोपी को कड़ी सुरक्षा के बीच जम्मू गंग्याल थाने की पुलिस ने जिला अदालत में पेश किया। पुलिस ने अदालत से उसकी हिरासत की मांग करते हुए कहा कि इस हमले के पीछे की असल वजह का पता लगाना जरूरी है। आरोपी के तार किसी संगठन या किसी आपराधिक व्यक्ति से तो नहीं हैं इसकी जांच की जानी है। इसके बाद अदालत ने आरोपी को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। साथ ही कहा कि आरोपी की हर 24 घंटे में उचित चिकित्सा जांच सुनिश्चित की जाए।
हमलावर बोला-वो सबसे बड़ा आतंकी
जम्मू के पुरानी मंडी निवासी आरोपी कमल को अदालत में पेश करने से पहले गांधीनगर अस्पताल में मेडिकल जांच कराने के लिए ले जाया गया। उसने यहां पत्रकारों से कहा, मैंने यह किसी के इशारे पर या किसी के दबाव में नहीं किया है। मैंने अपनी मर्जी से गोली चलाई है। इसी दौरान आरोपी ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि वो सबसे बड़ा आतंकवादी है।
डीआईजी रैंक का अधिकारी को साैंपी गई जांच
आरोपी के खिलाफ गंग्याल पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 और आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
2008 में सुरक्षा का हवाला देकर पिस्टल का लाइसेंस
हमलावर कमल सिंह जम्वाल ने 2008 में अपनी सुरक्षा का हवाला देकर पिस्टल का लाइसेंस लिया था। इसके बाद से नियमित रूप से लाइसेंस रिन्यू कराता रहा है। चुनाव के समय जिला प्रशासन के आदेशानुसार थाने में भी जमा कराता रहा है। हालांकि वर्तमान में लाइसेंस रिन्यू था या नहीं, पुलिस इसकी भी जांच कर रही है।
उमर ने उठाए सवाल-एनएसजी के बावजूद इतने नजदीक कैसे पहुंचा
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर हमले को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एनएसजी का जेड प्लस सुरक्षा कवर में होने के बावजूद हमलावर उनके पिता के इतने करीब कैसे पहुंच गया।
शुक्र है अल्लाह ने मुझे बचा लिया : फारूक
डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने वीरवार को कहा कि शुक्र है अल्लाह ने बचा लिया। सुरक्षाकर्मी ने आरोपी का हाथ पकड़ा जिससे वह असंतुलित हो गया और गोली हवा में चल गई। वे नहीं जानते कि आरोपी की क्या रंजिश थी। पुलिस को सुरक्षा का ख्याल रखना चाहिए था लेकिन वहां पुलिस के इंतजाम नहीं थे। देश में नफरत सबसे बड़ी चिंता का विषय है।
केंद्रीय मंत्री शाह ने की बात, जाना हाल
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने फारूक अब्दुल्ला से फोन पर बात कर उनका हाल-चाल जाना। उन्होंने उनकी सुरक्षा में हुई चूक और हमलावर के इरादों की गहन जांच का आश्वासन दिया। फारूक ने भी कहा- हां, गृह मंत्री ने भी मुझे फोन किया था। उन्होंने पूछा कि मैं कैसा हूं। मैंने उनसे कहा, अल्लाह की कृपा से मैं सुरक्षित हूं।
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