हैरानी की बात यह रही कि इतनी भारी हूटिंग के बावजूद मंत्री जी अपना भाषण देते रहे। वे करीब 6 मिनट तक बोले और अंत में जब शोर और बढ़ा, तो वे चार पंक्तियां सुनाने की जिद पर अड़ गए। दर्शकों की पीड़ा समझते हुए उन्होंने मंच से यह तो स्वीकार किया कि लोग कार्यक्रम देखने के लिए उत्सुक हैं, लेकिन फिर भी बिना अपनी कविता सुनाए और जयकारे लगवाए वे मंच से नीचे नहीं उतरे।
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इस पूरे घटनाक्रम पर वहां मौजूद विदेशी सैलानियों ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की। इटली के फ्लोरेंस से आए एलेसांद्रो ने कहा कि हम इटली में माहौल को महसूस करने और नृत्य देखने के आदी हैं, न कि लंबे भाषण सुनने के। हम अनुभव को जीना चाहते थे। वहीं उनकी साथी जूलिया ने बताया कि यह जगह और माहौल बेहद शानदार है, लेकिन मंत्री जी ने शायद कुछ ज्यादा ही बातें कर दीं। हम वास्तव में केवल नृत्य देखना चाहते थे।
खजुराहो के इस भव्य आयोजन में पहले ही दिन हुए इस घटनाक्रम ने व्यवस्थाओं और प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि दूर-दराज से आए पर्यटक कला देखने के लिए घंटों इंतजार कर रहे थे, जबकि मंच से सियासी भाषणों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा था।
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