क्या है चंद्र ग्रहण और सूतक काल का समय?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण शुरू होने से ठीक 9 घंटे पहले ‘सूतक काल’ लग जाता है. आज दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर ग्रहण की शुरुआत होगी, जो शाम 6 बजकर 47 मिनट तक चलेगा. हरिद्वार के प्रसिद्ध पंडित श्रीधर शास्त्री के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि 2 मार्च की शाम 5:56 बजे से शुरू हो चुकी है, जो आज यानी 3 मार्च की शाम 5:07 बजे तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार आज फाल्गुन पूर्णिमा का पावन दिन है और इसी दिन ग्रहण का साया होने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है.
गर्भवती महिलाएं रहें सावधान, न करें ये गलतियां
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं के लिए कड़े नियम बताए गए हैं. पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि ग्रहण काल (दोपहर 3:20 से शाम 6:47 तक) के दौरान गर्भवती महिलाओं को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को सोने से बचना चाहिए, क्योंकि ग्रहण के समय सोना वर्जित माना जाता है.
उन्होंने कहा कि चाकू, कैंची या सुई जैसी धारदार चीजों का इस्तेमाल बिल्कुल न करें. माना जाता है कि इससे गर्भ में पल रहे शिशु के अंगों पर बुरा असर पड़ सकता है. ग्रहण के वक्त घर से बाहर निकलना या सीधी आंखों से ग्रहण देखना नुकसानदेह हो सकता है. से में नकारात्मक शक्तियों को दूर रखने के लिए र्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को पूजा पाठ, मन में भक्ति भाव और मंत्रों का जाप करना चाहिए.
बुजुर्गों और बच्चों के लिए विशेष निर्देश
ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा का स्तर काफी बढ़ जाता है. ऐसे में नकारात्मक शक्तियों को दूर रखने के लिए र्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सीधी धूप या ग्रहण की रोशनी के संपर्क में आने से बचना चाहिए. ग्रहण को खुली आंखों से देखने पर आंखों की रोशनी से जुड़ी समस्याएं और शरीर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सकता है. यद्यपि बीमार व्यक्तियों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए खान-पान में कुछ छूट दी गई है, लेकिन उन्हें भी खुले में बैठकर भोजन करने से बचना चाहिए. उन्होंने बताया कि ग्रहण के वक्त खाना-पीना भी वर्जित होता है.
भोजन में तुलसी दल का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक शक्तियां सक्रिय रहती हैं, जिसका सीधा असर हमारे खान-पान पर पड़ता है. ग्रहण शुरू होने से पहले दूध, दही, पकी हुई सब्जी और पानी जैसे खाद्य पदार्थों में तुलसी का पत्ता (तुलसी दल) या कुशा घास डाल देनी चाहिए. तुलसी के प्रभाव से भोजन शुद्ध बना रहता है और उस पर ग्रहण की नकारात्मकता का असर नहीं होता.
क्या करें और क्या न करें?
मंत्र जप: ग्रहण के समय भगवान के नाम का स्मरण, गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना सर्वोत्तम होता है. इससे नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं.
पूजा-पाठ वर्जित: ग्रहण के दौरान मूर्तियों को स्पर्श करना या मंदिर में पूजा करना वर्जित है. सूतक काल लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं.
शुद्धिकरण: ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें और स्नान करके दान-पुण्य अवश्य करें.
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