अररिया व्यवहार न्यायालय परिसर में शनिवार, 14 मार्च को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। लंबित मामलों के त्वरित, सुलभ और निःशुल्क निपटारे के उद्देश्य से होने वाली इस लोक अदालत की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह वर्ष 2026 की पहली प्रमुख राष्ट्रीय लोक अदालत होगी। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में आयोजित इस लोक अदालत में आपसी समझौते के आधार पर सुलहनीय वादों का निस्तारण किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, इसके लिए कुल 16 बेंचों का गठन किया गया है। इन बेंचों पर अनुभवी न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और लोक अदालत के सदस्य मौजूद रहेंगे, जो पक्षकारों के बीच मध्यस्थता कर समझौता करवाएंगे। राष्ट्रीय लोक अदालत में मुख्य रूप से बैंक लोन और धन वसूली से संबंधित मामले, चेक बाउंस के केस, पारिवारिक विवाद, भरण-पोषण, गुजारा भत्ता, संपत्ति-जायदाद का बंटवारा, मोटर दुर्घटना दावा, बिजली, पानी, टेलीफोन बिल विवाद तथा अन्य सुलहनीय दीवानी और आपराधिक मामले निपटाए जा सकेंगे। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुंजन पाण्डेय ने हाल ही में जागरूकता अभियान के तहत प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में केवल जीत ही जीत है, हार नहीं, जिससे गरीब, मध्यम वर्ग और आम जनता को सस्ता और तेज न्याय मिलेगा। अधिकारियों ने सभी पक्षकारों से अपील की है कि वे 14 मार्च को सुबह 10 बजे से व्यवहार न्यायालय परिसर पहुंचें। यदि कोई लंबित मामला सुलहनीय है, तो संबंधित न्यायालय में 13 मार्च तक आवेदन कर उसे लोक अदालत में रखवाया जा सकता है। अधिक से अधिक मामले निपटाने के लिए प्री-लोक अदालत सत्र भी आयोजित किए गए हैं। यह लोक अदालत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर हो रही है। जिला प्रशासन और विधिक सेवा प्राधिकार का लक्ष्य हजारों लंबित मामलों का बोझ कम करना और न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाना है। अररिया जिले के निवासियों के लिए यह बिना कोर्ट फीस, वकील की भारी फीस और लंबी सुनवाई के तुरंत न्याय प्राप्त करने का सुनहरा अवसर है। अधिक जानकारी के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
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