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किसान किशोर कुमार ने कहा कि खीरे की खेती में देसी तरीके से इसमें अलान बनाते हैं जो कि बांस और रस्सी की मदद से तैयार हो जाता है. उन्होंने बताया कि खीरे की खेती से गर्मी के सीजन में बढ़िया कमाई होती है.इस फसल में महज 45-60 दिन के बाद से ही फूल-फल आने शुरू हो जाते हैं. इसके बाद धीरे-धीरे दो चार दिनों के अंतराल पर लगभग 1-2 क्विंटल खीरा टूट जाता है.
अररिया जिले के किसान किशोर कुमार ने लोकल 18 को बातचीत में बताया कि खीरे की खेती कम लागत और कम समय में ही फल आना शुरू हो जाते हैं. वहीं किसान किशोर कुमार ने बताया कि खीरे की खेती में देसी तरीके से इसमें अलान बनाते हैं जो कि बांस और रस्सी की मदद से तैयार हो जाता है. उन्होंने बताया कि खीरे की खेती से गर्मी के सीजन में बढ़िया कमाई होती है.क्योंकि गर्मी के समय में सभी लोगों को खीरा खाना बहुत पसंद होता है, इसलिए गर्मी के समय में खीरे का भाव भी मार्केट में बढ़िया मिल जाता है. इस फसल में महज 45-60 दिन के बाद से ही फूल-फल आने शुरू हो जाते हैं. इसके बाद धीरे-धीरे दो चार दिनों के अंतराल पर लगभग 1-2 क्विंटल खीरा टूट जाता है.
सीजन में दो लाख की कमाई
अररिया जिले के कचहरी बलुआ गांव के किसान किशोर कुमार ने बताया कि इस खीरे की खेती में कम-से-कम जैविक खाद का ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए. इस फसल में अधिक सिंचाई भी नहीं करना पड़ती है. हालांकि, अधिक गर्मी होने पर एक या दो बार खीरे के खेतों में बढ़िया से सिंचाई करते हैं, बाकी दिनों हल्के-हल्के पानी से भी काम चल जाता है. उन्होंने बताया कि खीरे की खेती से अररिया जिले के किसान इस समय बढ़िया कमाई अर्जित कर सकते हैं. एक सीजन में लगभग दो लाख रुपए से अधिक तक की कमाई करते हैं.
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