शहर के थाना कोतवाली अंतर्गत एक व्यक्ति ने अपने ही परिचित से 15 लाख रुपये उधार लिए और जब लौटाने की बारी आई, तो किसी अन्य व्यक्ति के चेक पर फर्जी हस्ताक्षर कर उसे थमा दिया। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है।
शिकायतकर्ता योगेंद्र पटेल निवासी तोरनोद ने पुलिस को बताया कि आरोपी पूर्व बैंक कर्मचारी अंकित घाटे निवासी हैप्पीविला कॉलोनी धार से उनकी पुरानी और अच्छी जान-पहचान थी। जनवरी 2022 में आरोपी अंकित ने अपनी पारिवारिक जरूरतों का हवाला देते हुए योगेंद्र से 15 लाख रुपये की मदद मांगी जिसके चलते योगेंद्र ने अपने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खाते से 15 लाख रुपये नगद निकालकर उसे उधार दे दिए।
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चेक बाउंस होने पर खुला राज
जब योगेंद्र चौधरी ने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपी टालमटोल करने लगा। काफी दबाव बनाने के बाद दिसंबर 2024 में अंकित ने योगेंद्र को 15 लाख रुपये का एक चेक दिया। जब योगेंद्र चौधरी ने इस चेक को अपने बैंक में जमा किया तो बैंक ने हस्ताक्षर मिलान न होने के कारण चेक रिजेक्ट कर दिया। संदेह होने पर जब मामले की जांच की गई, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जिस चेक को अंकित घांटे ने अपना बताकर दिया था, वह असल में गजराज चौधरी नामक व्यक्ति का था। आरोपी अंकित ने गजराज से लोन दिलाने के बहाने कोरा चेक और पासबुक ली थी, जिसका उसने दुरुपयोग किया। अंकित ने उस कोरे चेक पर खुद हस्ताक्षर किए और योगेंद्र चौधरी को ठगने की नियत से उसे दे दिया।
थाना कोतवाली पुलिस ने आवेदन की विस्तृत जांच और जिला अभियोजन अधिकारी से कानूनी राय लेने के बाद आरोपी अंकित घाटे के विरुद्ध कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिताकी धारा 318(4) धोखाधड़ी, 338, 336(3) और 340(2) के तहत मामला पंजीबद्ध किया है।
आवेदक की शिकायत पर जांच की गई, जिसमें पाया गया कि आरोपी ने जानबूझकर धोखाधड़ी की नियत से दूसरे व्यक्ति के चेक का उपयोग किया। आरोपी के खिलाफ उचित धाराओं में मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।
-दीपक सिंह चौहान, थाना प्रभारी कोतवाली
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