भाजपा नेता अमित शाह ने हरिद्वार रैली से कई खुले और कुछ बंद संदेश राज्य के बड़े नेताओं को दिए हैं। गंगा किनारे लगातार तीसरी जीत के संकल्प के साथ उन्होंने जीत का जो बीज मंत्र दिया है उस पर चलकर भाजपा आसानी से पुन: सत्ता तक पहुंच सकती है। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व जानता है कि अगले चुनाव में युवा मतदाता निर्णायक भूमिका में होंगे। ऐसे में शाह के जिगर के टुकड़ों (युवाओं) की धड़कन सरकार और संगठन को और अच्छे से सुननी होगी।
शाह के बंद संदेश से भी स्पष्ट है कि अब नेताओं को गुटबाजी और बयानबाजी पर विराम लगाकर चुनाव की तैयारियों में जुटने को कह दिया है। उन्होंने राज्य सरकार की उपलिब्धयां गिनाकर उन नेताओं को भी खामोश किया है जो सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते रहे हैं।
अमित शाह जानते हैं कि उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां पलायन और रोजगार हमेशा बड़े मुद्दे रहते हैं, युवाओं का साथ होना कितना जरूरी है। उन्होंने युवाओं को ”जिगर के टुकड़े” कहकर संबोधित किया। वहीं युवाओं ने संबोधन को उत्साह से आत्मसात किया। उन्होंने कोशिश की कि युवा मतदाताओं में यह भावना भरे कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार उनके भविष्य को लेकर गंभीर है। कहीं न कहीं भावनात्मक जुड़ाव के जरिए विपक्ष के बेरोजगारी वाले मुद्दे की धार कुंद करने का प्रयास किया।
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