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Genda ki Kheti se Munafa: अंबिकापुर के डिगमा गांव की एक महिला ने डेढ़ एकड़ में 12 महीने गेंदे की खेती कर सालाना 2 से 3 लाख रुपये की आय का मजबूत जरिया बनाया है. कभी मजदूरी करने वाली सुचित्रा अब अपने फूलों की मालाएं शहर के बाजार में सप्लाई करती हैं और रोजाना 1000 से ज्यादा मालाएं बेचती हैं. श्री विधि और ड्रिप सिस्टम से उन्होंने कम लागत में बेहतर पैदावार हासिल की है. विहान योजना से मिले प्रशिक्षण और ऋण ने उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल दी. जानिए कैसे मेहनत और सही योजना से उन्होंने खुद और परिवार को आत्मनिर्भर बनाया.
रोज 1000 मालाएं, बाजार में जबरदस्त डिमांड
सुचित्रा खुद फूल तोड़कर मालाएं बनाती हैं और शहर के घड़ी चौक की दुकानों में सप्लाई करती हैं. एक माला 20 से 30 रुपये तक बिकती है. गर्मी और शादी के सीजन में जयमाला के ऑर्डर अलग से मिलते हैं. वो बताती हैं कि रोजाना करीब 1000 मालाएं बाजार में भेजती हैं. सीजन में ऑर्डर और बढ़ जाते हैं, जिससे कमाई भी बढ़ती है.
ड्रिप सिस्टम और श्री विधि से बढ़ी पैदावार
खेती में उन्होंने श्री विधि अपनाई है और ड्रिप सिंचाई सिस्टम लगाया है. पौधों को सही दूरी पर लगाने से पानी की बचत होती है और फूल ज्यादा आते हैं. कम लागत और अच्छी पैदावार ने इस खेती को फायदे का सौदा बना दिया है.
सालाना 2 से 3 लाख की कमाई
सुचित्रा बताती हैं कि गेंदे की खेती से सालाना 2 से 3 लाख रुपये की आय हो जाती है. पहले वे मजदूरी करती थीं, लेकिन अब खेती से स्थायी कमाई का जरिया बन गया है.
बिहान योजना से बदली तकदीर
वे बिहान योजना से जुड़ी हैं और इसी योजना के जरिए उन्हें प्रशिक्षण व 10 लाख रुपये तक का ऋण मिला. अब उन्हें बाहर से कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती. आज उनका बेटा अपनी दुकान चला रहा है और परिवार पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुका है. सुचित्रा की कहानी गांव की दूसरी महिलाओं के लिए भी नई उम्मीद बन गई है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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